फिल्म – चांद मेरा दिल है
निर्माता – धर्मा प्रोडक्शंस
निर्देशक – विवेक सोनी
कलाकार – अनन्या पांडे ,लक्ष्य, परेश पाहूजा,अंकुर पोडर, आशीष दुबे ,चांदनी, आस्था सिंह और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -दो
chand mera dil hai review : धर्मा प्रोडक्शंस और रोमांटिक फिल्में यह जोड़ी सुपरहिट रही है लेकिन पिछले कुछ समय से परदे पर वह प्यार का जादू मिसिंग है. जो सुकून दें और उससे जुड़ा इमोशन आँखों को नम कर दे.सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी, तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी के बाद आज रिलीज हुई चाँद मेरा दिल है भी इसी फेहरिस्त में शामिल हो गयी है. फिल्म के कमजोर लेखन ने चाँद मेरा दिल के किरदारों और परफॉरमेंस को भी कमजोर कर दिया है.
ये है फिल्म कहानी
फिल्म की कहानी की बात करें तो फिल्म हैदराबाद में सेट है लेकिन शुरू यूएसए से होती है। आरव (लक्ष्य )वहां अपनी पढाई के लिए गया हुआ है। चांदनी (अनन्या पांडे )से उसकी बात वीडियो कॉल पर होती है और ये मालूम पड़ता है कि दोनों अलग हो चुके हैं. इसके साथ ही हैदराबाद में कॉलेज रियूनियन पर मिलने की बात होती है लेकिन चांदनी मना कर देती है. कॉलेज रियूनियन के दौरान आरव बीती बातों को याद करने लगता है और कहानी 2017 में पहुँच जाती है. जब आरव और चांदनी हैदराबाद के इसी कॉलेज में इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे थे. लव स्टोरी है तो प्यार तो होना ही था. प्यार होने के बाद लव स्टोरी में कुछ ऐसा हो जाता है कि दोनों को कॉलेज में पढ़ते हुए ही शादी करनी पड़ती है. दोनों के परिवार इसके खिलाफ हैं. ऐसे में शादी के बाद की जिम्मेदारियों के साथ पढाई ,एग्जाम और प्लेसमेंट की जमीनी हकीकत से भी वह रूबरू होते हैं.इस मुश्किल हकीकत में आरव का सब्र एक वक़्त के लिए टूट जाता है, जिससे चांदनी और आरव का तलाक हो जाता है.चांदनी किसी और से शादी करने का फैसला लेती है. जिसके बाद आरव आगे की पढाई के लिए यूएस चला जाता है. कहानी फिर वर्तमान में आ जाती है.कॉलेज रियूनियन में क्या आरव और चांदनी एक हो पाएंगे. चांदनी ने क्या किसी और से शादी कर ली है. क्या वह आरव को माफ़ कर अपने रिश्ते को दूसरा मौक़ा दे पाएगी. इन सब सवालों के जवाब फिल्म देती हैं।
फिल्म की खूबियां और खामियां
चाँद मेरा दिल है के ट्रेलर को देखकर लगा था कि यह एक टिपिकल रोमांटिक फिल्म होगी। जिसमें दो लोग एक दूसरे से प्यार तो करते हैं लेकिन वह एक साथ नहीं रह सकते हैं.लगा था जेन जी वाला कुछ मामला होगा लेकिन फिल्म जेन जी लव स्टोरी नहीं है। यह छोटी उम्र में शादी उससे जुड़ी जिम्मेदारियों जिससे टूटते सपनों की भी कहानी है.फिल्म टॉक्सिक और अनहेल्दी रिलेशनशिप के साथ पर भी बात करती है लेकिन सब कुछ होते हुए भी यह एक यादगार इंटेंस लव स्टोरी नहीं बन पायी क्योंकि कहानी कमजोर है. कहानी का जो कॉन्फ्लिक्ट है. वह प्रभावी नहीं बन पाया है. चांदनी का आरव को आखिर में माफ़ कर देना टिपिकल लगता है. जैसे ढाई घंटे होने वाले हैं। फिल्म खत्म करना है तो हैप्पी एंडिंग कर देते हैं. फर्स्ट हाफ औसत है. सेकेंड हाफ में खिंच गयी है.मामला रिपेटिटिव हो गया है और क्लाइमेक्स भी प्रेडिक्टबल है. फिल्म को हैदराबाद में सेट किया गया है.आरव के एक दोस्त को छोड़ दें तो किसी में भी वहां की भाषा का टच संवाद में नहीं दिखा है. खासकर चांदनी के किरदार में , जबकि उसका किरदार इस बात को कहता है कि वह हैदराबाद में ही हमेशा रहेगी नहीं तो उसकी माँ अकेली हो जायेगी. फिल्म में हैदराबाद के कनेक्शन को दिखाने के लिए बिरयानी का ही इस्तेमाल इस फिल्म में भी हुआ है. कहानी में दोस्ती को थोड़ा और एक्सप्लोर किया जाना चाहिए था.आरव का किरदार जब ब्रेअकप से जूझ रहा था तो कोई भी दोस्त उसके आसपास नहीं था। दरअसल फिल्म की कहानी किसी भी सह कलाकार को कुछ ख़ास करने का मौक़ा नहीं देती है.माता पिता के किरदार आधे अधूरे से लगते हैं. फिल्म के संवाद कमजोर हैं. सचिन जिगर का गीत संगीत औसत है.प्लेटफार्म पर किसिंग सीक्वेंस वाला वीएफएक्स बेहद ख़राब रह गया है.बाकी के पहलू ठीक ठाक है.
लक्ष्य और अनन्या के बीच केमिस्ट्री मिसिंग
अभिनय की बात करें तो अभिनेता लक्ष्य ने अपनी काबिलियत को फिल्म किल और वेब सीरीज बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड में पहले ही साबित कर दिया है. इस फिल्म में भी उन्होंने अपने किरदार की जर्नी बखूबी परदे पर दर्शाया है.अनन्या पांडे ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है लेकिन फिल्म के पहले दृश्य से लेकर आखिर तक आठ साल का अंतराल होने के बावजूद उनके लुक में थोड़ा भी बदलाव नहीं आया है.सबसे अहम बात यह एक इंटेंस लव स्टोरी है लेकिन फिल्म में लक्ष्य और अनन्या के बीच वह केमिस्ट्री मिसिंग है , जो इस बात को साबित करे कि प्यार में पागलपन जरुरी है.बाक़ी के किरदारों को करने को ज्यादा कुछ ख़ास नहीं था. सभी अपनी अपनी भूमिका में जमें हैं.
