mirzapur the movie review: बड़े परदे पर भी मिर्जापुर का जलवा रहा कायम

मिर्जापुर फ़िल्म ,वेब सीरीज की तरह कल्ट भले ही ना बन पायी हो लेकिन पैसा वसूल मास एंटरटेनर बनकर उभरी हैं .

फ़िल्म- मिर्जापुर द मूवी

निर्माता - एक्सेल एंटरटेनमेंट

निर्देशक - गुरमीत सिंह

कलाकार - पंकज त्रिपाठी ,दिव्येन्दु,अली फ़ज़ल,जितेन्द्र,रशिका दुग्गल ,रवि किशन,अनंगशा ,राजेश तैलंग,श्वेता त्रिपाठी ,हर्षिता गौर,सोनल चौहान,सुशांत सिंह ,मोहित मल्लिक,अभिषेक बनर्जी और अन्य

प्लेटफार्म - सिनेमाघर

रेटिंग-तीन

mirzapur the movie :ओटीटी प्लेटफार्म में वेब सीरीज से शुरू हुई मिर्जापुर की कहानी आज रुपहले पर्दे तक पहुंच गई है. यह पहली भारतीय सीरीज होगी, जिसे फीचर फिल्म के तौर पर बड़े परदे के लिए बनाया गया है.यह पहलू इसके लोकप्रियता की कहानी ख़ुद ब ख़ुद कह जाती है.ओटीटी में भौकाल मचाने के बाद क्या रुपहले पर्दे पर भी मिर्जापुर भौकाल मचाने में कामयाब रही है .इसको जानने के लिए पढ़े यह रिव्यू

ये है फ़िल्म की कहानी

फ़िल्म की कहानी की बात करें तो वेब सीरीज के सारे किरदार और उनके रिश्तों का समीकरण लगभग वही है .अगर क्लाइमेक्स में हुए मुन्ना भैया और गुड्डू भैया की दोस्ती प्रसंग को छोड़ दें तो खैर कहानी पर आते हैं.वेब सीरीज की तरह फ़िल्म में भी मिर्जापुर की गद्दी की खींचतान है .नेता जे पी यादव ( प्रमोद पाठक ) और रति शंकर शुक्ला ( शुभ्रज्योति )मिलकर अखंडानंद त्रिपाठी ( पंकज त्रिपाठी ) का खात्मा कर मिर्जापुर की गद्दी हासिल करना चाहते हैं. फ़िल्म में उनका साथ देने के लिए जैसलमेर से आए बाहुबली बब्बन बबुआ ( रवि किशन )की एंट्री हुई है. जिसकी महत्वकांक्षा भी मिर्जापुर की गद्दी का किंग बनना है.कालीन भैया से मिर्जापुर की गद्दी के साथ क्या उनकी जिंदगी छीन भी ली जायेगी. गुड्डू भैया ( अली फ़ज़ल),बबलू (जितेंद्र ) और मुन्ना भैया ( दिव्येंदु) .क्या ये होने देंगे. मिर्जापुर की गद्दी के लिए खून खराबे के साथ साथ पुराना प्यार और उससे जुड़ा बदला भी है. क्या है ये सब इसे जानने के लिए आपको थिएटर की ओर रुख करना होगा


जितेन्द्र और अली फजल मिर्जापुर के एक सीन में, फोटो- इंस्टाग्राम

फ़िल्म की खूबियाँ और खामियाँ

मिर्जापुर के मेकर्स ने जब मिर्जापुर फिल्म की घोषणा की तो उत्साह बढ़ने के साथ यह सवाल भी मन में था कि कहानी में क्या नयापन होगा. फिल्म देखने के बाद यह बात महसूस होती है कि मूल कहानी वेब सीरीज की तरह मिर्जापुर के गद्दी के किंग बनने की ही है लेकिन जिस एंगेजिंग तरीके से और लोकप्रिय किरदारों के ज़रिए उसे परदे पर दिखाया गया है.वह आपको फ़िल्म से जोड़ देता है . वेब सीरीज की तरह फ़िल्म के डायलॉग भी शानदार बने हैं .मेकर्स ने वेब सीरीज का ट्रीटमेंट लार्जर देन लाइफ किया था तो फिल्म में वह और बढ़ चढ़कर होना ही था. लैंडस्केप में नयापन जोड़ने के लिए सिर्फ मिर्जापुर में कहानी नहीं है बल्कि इसका अहम हिस्सा राजस्थान भी इस बार बना हुआ है. जो फिल्म को अलग ही लुक देने में कामयाब हुआ है. एक्शन सीन अच्छे हैं .यूपी के क्राइम स्टेट के तौर पर प्रस्तुत करने का सीरीज पर आरोप लगता रहा है,लेकिन फ़िल्म यूपी से जुड़े एक अच्छे पहलू को भी दिखा गई है . यूपी में पेट्रोल दूसरे राज्यों के मुक़ाबले सस्ता है .फ़िल्म के ट्रीटमेंट में ख़ामियाँ भी रह गई हैं. मिर्जापुर वेब सीरीज में शॉक वैल्यू होता है . कोई भी कभी भी धोखा दे सकता है या खून ख़राबे पर उतर सकता है . वह शॉक वैल्यू मिसिंग है .फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है . सेकंड हाफ में फ़िल्म रफ़्तार पकड़ती है .फ़िल्म की कहानी में पुलिस की भागीदार नहीं के बराबर है . यह पहलू अखरता है .अमित सियाल के किरदार की ज़रूरत थी.कुलमिलाकर वेब सीरीज की तरह फ़िल्म कल्ट भले ही ना हो लेकिन पैसा वसूल मास एंटरटेनर ज़रूर बनकर उभरी है .

गीत संगीत अपीलिंग

गीत संगीत अपीलिंग फ़िल्म के गीत संगीत की बात करें तो पूरे जिले में हमारा भौकाल है और बंदे एक नंबर के धंधे दो नंबरी फिल्म के जॉनर और किरदारों के स्वैग के साथ बखूबी मैच करता है.विंध्यवासिनी गीत और घूमर गीत पूर्वांचल और राजस्थान की खुशबू खुद में समेटे हुआ है.फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक दमदार है. जो फिल्म के रोमांच को बढ़ाता है.


रवि किशन और सोनल चौहान, फोटो- इंस्टाग्राम

रवि किशन ,पंकज और दिव्येंदु चमके

मिर्जापुर की खासियत इसकी कास्टिंग रही है. लेखन टीम हर किरदार को इतनी गहराई देते हैं कि लीड एक्टर्स से लेकर सपोर्टिंग रोल निभाने वाले सभी किरदार यादगार बन जाते हैं हैं . फ़िल्म में भी वही बात नज़र आई है .फ़िल्म में भी वही दमदार एक्टर्स की टोली है. जिन्होंने अपने भौकाल और स्वैग से फ़िल्म को ख़ास बनाया है..इंडियन वर्जन ऑफ़ हल्क यानी अली क़ा काम बढ़िया है . जितेंद्र,बबलू त्रिपाठी की भूमिका में फिट बैठे हैं.अभिषेक,मोहित मलिक के अलावा पंक्चर के छोटे से रोल में सत्येंद्र सोनी का काम भी अच्छा है लेकिन बाज़ी पंकज त्रिपाठी ,रवि किशन और दिव्येंदु के हाथ लगी है . पंकज़ त्रिपाठी ने एक बार फिर आँखों और गर्दन के इशारे भर से जबरदस्त ख़ौफ़ पैदा किया है .मुन्ना भैया के किरदार में दिव्येंदु ने एंटी हीरो वाला जलवा जमकर दिखाया है. फ़िल्म में उनका स्वैग,डायलॉग ( जैसलमेर हमको नहीं देखा है )सब यादगार है .केक वाला सीन हो या जे पी यादव के साथ वाला सीक्वेंस मज़ेदार बन पड़ा है .रवि किशन की एंट्री मिर्जापुर यूनिवर्स में नई है. उनके शब्दों में कहें तो उन्होंने अद्भुत तरीके से अपने रस्टिक अभिनय से इस यूनिवर्स को कॉम्प्लिमेंट किया है.मिर्जापुर यूनिवर्स में महिला किरदारों की अहम भूमिका होती है .इस फ़िल्म में सभी महिला किरदार नज़र तो आई हैं लेकिन कहानी में योगदान बीना त्रिपाठी यानी रसिका दुग्गल का ही रहा है . सोनल चौहान ने फ़िल्म में ग्लैमर पोर्शन को संभाला है तो शीबा अपनी मौजूदगी से चुटीले पीके जोड़ती हैं .


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >