कभी करती थीं झाड़ू-पोछा, पिता ने 1 लाख रुपये इस शर्त पर दिए थे उधार, फिर ऐसे बनीं घर-घर की तुलसी

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कभी करती थीं झाड़ू-पोछा, पिता ने 1 लाख रुपये इस शर्त पर दिए थे उधार, फिर ऐसे बनीं घर-घर की तुलसी
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स्मृति ईरानी, फोटो- इंस्टाग्राम

छोटे पर्दे की पॉपुलर बहू तुलसी विरानी बनकर घर-घर में पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी की जिंदगी हमेशा से इतनी आसान नहीं थी. आइए आपको इस बारे में बताते हैं.

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आसान नहीं था टीवी की तुलसी बनने तक का सफर

आज वह करोड़ों की संपत्ति, बड़ी पहचान और राजनीति में अहम मुकाम हासिल कर चुकी हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है.

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बड़े सपनों के साथ शुरू हुआ सफर

स्मृति ईरानी को टीवी की सबसे लोकप्रिय बहुओं में से एक माना जाता है. हालांकि, मनोरंजन जगत में कदम रखने से पहले उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी. स्मृति के मन में हमेशा कुछ बड़ा करने की इच्छा थी. इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक पेजेंट प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया. लेकिन इसके लिए उन्हें 1 लाख रुपये की जरूरत थी.

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इस तरह चुकाए पैसे

यह रकम उनके पिता ने उन्हें कर्ज के तौर पर दी थी. उनके पिता ने पैसे देते हुए एक शर्त रखी थी कि अगर वह यह रकम वापस नहीं कर पाईं, तो उन्हें शादी करनी होगी. नीलेश मिश्रा संग इंटरव्यू में स्मृति ने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि पेजेंट से मिले गिफ्ट्स की मदद से वह 60 हजार रुपये वापस कर पाई थीं, लेकिन अभी भी 40 हजार रुपये बाकी थे. इसके बाद वह नौकरी की तलाश में मैकडॉनल्ड्स पहुंचीं.

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स्मृति ने कहा- मुझे 1500 रुपये मिलते थे

स्मृति ने बताया था, "मैं मैकडॉनल्ड्स गई थी और वहां सिर्फ दो स्लॉट बचे थे. उन्होंने कहा कि यह एक फाउंडेशनल जॉब है. मैंने पूछा कि इसका मतलब क्या है? उन्होंने बताया कि इसमें झाड़ू लगाना, पोछा करना और बर्तन धोना शामिल है. मैंने कहा ठीक है. इस काम के लिए मुझे 1500 रुपये मिलते थे." स्मृति हफ्ते में छह दिन मैकडॉनल्ड्स में काम करती थीं और अपने ऑफ के दिन टीवी शो के लिए ऑडिशन देती थीं.

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ऐसे बनीं घर-घर की तुलसी

लगातार कोशिशों के बाद स्मृति ईरानी को टीवी में पहला मौका मिला. इसके बाद साल 2000 में आए टीवी शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी में उन्होंने तुलसी विरानी का किरदार निभाया. इस रोल ने उन्हें टीवी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया. जुलाई 2025 में उन्होंने 17 साल बाद फिर से टीवी पर वापसी की और क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 में तुलसी के किरदार को दोबारा निभाया.

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टीवी से राजनीति तक का सफर

स्मृति ईरानी ने सिर्फ अभिनय के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई. वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में सबसे कम उम्र की मंत्रियों में शामिल रही हैं. उन्होंने केंद्र सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री और कपड़ा मंत्री जैसे पद संभाले.

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लेखक के बारे में

By दिव्या केशरी

दिव्या केशरी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम की लीड के रूप में कार्यरत हैं. वह 2020 से प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी हुई हैं और तब से लगातार फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री की खबरों को कवर कर रही हैं. उनके पास लगभग 8 साल का जर्नलिज्म एक्सपीरियंस है. एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में उनकी मजबूत पकड़ फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बीटीएस अपडेट्स, थ्रोबैक स्टोरी, गॉसिप और ट्रेंडिंग एंटरटेनमेंट न्यूज पर है. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को आसान, भरोसेमंद और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि पाठक सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि खबर से जुड़ाव भी महसूस करें.

शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत

दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.

खबरों को लेकर सोच

दिव्या केशरी का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता सिर्फ मनोरंजन की खबरें देना नहीं, बल्कि पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और रोचक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिसकी मदद से वह किसी भी खबर की गहराई तक पहुंचती हैं. वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, Google Discover फ्रेंडली और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करती हैं, ताकि पाठकों को सही जानकारी आसानी से मिले और उनका पढ़ने का अनुभव बेहतर हो.

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