TMKOC: 1.5 साल तक बेरोजगार रहे 'जेठालाल' और फिर मिला रोल जिसने बना दिया सितारा

TMKOC: दिलीप जोशी एक समय 1.5 साल तक बेरोजगार रहे और उन्हें किसी अच्छे प्रोजेक्ट का इंतजार था. इसी दौरान उन्हें तारक मेहता का उल्टा चश्मा में चंपकलाल गड़ा यानी बापूजी का रोल ऑफर हुआ. हालांकि उनके पास उस वक्त कोई बड़ा काम नहीं था, फिर भी उन्होंने यह किरदार निभाने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि यह रोल उनके व्यक्तित्व और अभिनय शैली के अनुसार नहीं है. कुछ समय बाद शो के मेकर्स ने उन्हें फिर से अप्रोच किया, लेकिन इस बार जेठालाल के लीड रोल के लिए. उन्होंने वह ऑफर स्वीकार कर लिया और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया.

TMKOC: तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठालाल का किरदार निभाने वाले दिलीप जोशी आज हर घर में पहचाने जाते हैं. लेकिन इस सफर के पीछे एक संघर्ष और बड़ा फैसला छिपा है. क्या आप जानते हैं कि दिलीप जोशी को पहले बापूजी का रोल ऑफर हुआ था? उन्होंने यह रोल नहीं किया और करीब डेढ़ साल तक बेरोजगार रहे, लेकिन उनके इस फैसले ने उनकी किस्मत बदल दी. तो आइए, जानते हैं उनके संघर्ष, सब्र और सफलता की कहानी.

एक फैसले ने बदल दी किस्मत की दिशा

दिलीप जोशी एक समय एक्टिंग की दुनिया में काम की कमी से जूझ रहे थे और काफी समय तक बेरोजगार रहे. इसी बीच उन्हें तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो के लिए चंपकलाल गड़ा यानी बापूजी का किरदार ऑफर हुआ, लेकिन उन्होंने इस रोल को करने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि यह किरदार उनके व्यक्तित्व और ऊर्जा से मेल नहीं खाती. हालांकि उस समय उनके पास कोई दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट नहीं था, फिर भी उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और एक सही मौके का इंतजार किया. कुछ समय बाद, शो के मेकर्स ने उन्हें फिर से अप्रोच किया लकिन इस बार लीड रोल जेठालाल के लिए. दिलीप जोशी ने इस बार बिना झिझक हां कह दी और यही रोल उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया. आज वही जेठालाल, हर घर में हंसी की वजह है और दिलीप जोशी की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है.

इंटरव्यू में बताया अपना संघर्ष

दिलीप जोशी ने डॉ. प्रीति के यूट्यूब इंटरव्यू में बताया कि उन्हें जीवन की सबसे गहरी सीख हरिवंश राय बच्चन की एक पंक्ति से मिली “मन का हो तो अच्छा, और मन का न हो तो और भी अच्छा.” एक समय था जब वो डेढ़ साल तक बेरोजगार थे और उन्होंने बताया कि जब भी वो किसी चीज को लेकर बहुत उम्मीद लगाते थे जैसे कोई फिल्म, सीरियल या नाटक तो वो मौका हाथ से निकल जाता था. उस वक्त उन्हें बहुत निराशा हुए, लेकिन जल्द ही उन्हें ‘जेठालाल’ का किरदार मिला जिसने सब कुछ बदल दिया. तब समझ आया कि जो नहीं होता, उसमें भी भलाई छुपी होती है. यही सोच आज भी उन्हें तनाव से उबरने की ताकत देती है.

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By Samiksha Singh

Samiksha Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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