happy Father’s day 2026:सोनी लिव पर इनदिनों वेब सीरीज गुल्लक 5 स्ट्रीम कर रही है.इस शो में अभिनेता जमील खान, संतोष मिश्रा की भूमिका में है.वह अब तक की जर्नी को बहुत ही आनंदित करने वाला और यादगार सफर बताते हैं.इस शो से जुड़े अब तक के सफर के साथ साथ उन्होंने फादरहुड पर भी बात की है.उर्मिला कोरी से हुई बातचीत
हर सीजन से पहले वर्कशॉप होती है
संतोष मिश्रा का सुर बिठाने में अब ज्यादा समय नहीं लगता है.वैसे हर सीजन के शुरू होने से पहले हमारी वर्कशॉप रहती है.इसे मैं बहुत जरुरी भी मानता हूँ क्योंकि हम दूसरे प्रोजेक्ट्स में अलग अलग किरदार करते रहते हैं। ऐसे में शूटिंग से पहले वर्कशॉप हमें किरदार के करीब ले जाता है
पूरे मिडिल क्लास का वैल्यू सिस्टम एक जैसा
पहला सीजन जब आया था और उसको जो मकबूलियत मिली है. उसके बाद सेकेण्ड सीजन आया। उसको तो लोगों ने जिस तरह का प्यार दिया वह हमें भी उम्मीद नहीं था. वैसे यह पहला शो है, जिसके पांच सीजन आ चुके हैं.यह हमारे लिए बहुत फक्र की बात है.जब तक पब्लिक नहीं बोलेगी अब बस बहुत हो गया. हम इसका दमन नहीं छोड़ेंगे. शो की यूएसपी ये है कि यह हर घर की कहानी है.जो लोग शो देखते हैं. वह कहीं ना कहीं इससे रिलेट करते है क्योंकि मिडिल क्लास बहुत बड़ा तबका है. मिडिल क्लास में अपर. मिडिल और लोअर आते हैं. रहन सहन में फर्क हो लेकिन वैल्यू सिस्टम एक जैसा ही है.
संतोष मिश्रा के किरदार ने संवेदनशील बनाया
संतोष मिश्रा और मैं एक दूसरे से जुड़ चुके हैं.शुरुआत में ऐसा नहीं था.संतोष मिश्रा से मैं भी तो सीख रहा हूँ. मुझे लगता है कि यह हर सेंसिटिव एक्टर के लिए होना चाहिए कि वह जो किरदार कर रहा है. वह उससे क्या सीख रहा है. अगर उसमें वो चीजें नहीं है तो क्या वह किरदार उसे संवेदनशील बना रहा है. ये होना चाहिए क्योंकि राइटर ने तो लिख दिया लेकिन एक्टर को जीना है. जब हम जीते हैं.क्या हम सेंसिटिविटी के साथ उस चीज को देख या समझ रहे हैं.यही वजह है कि इस प्रोसेस में मेरा किरदार और संतोष मिश्रा का किरदार एक दूसरे के अंदर काफी हद तक आता जाता है.
मेरे पिता ने चीजों की अहमियत करने की सीख दी
मेरे अंदर हमेशा से मिडिल क्लास वैल्यू रहे हैं. मेरी तरबियत ऐसी थी। मैं अक्सर इसका उदाहरण देता हूँ कि मेरे पिता इतने ज्यादा रईस थे कि फ्लाइट में कहीं भी हमें भेज सकते थे लेकिन वो हमें हमेशा बस और ट्रेन में सफर करने को बोलते थे।वह खुद भी हमारे साथ ट्रेन से ही आते जाते थे.जब तक बहुत जरुरी ना हो. चीजों की अहमियत को वे सीखाते थे। शोशेबाजी में मत जाओ. अपने किरदार और एस्पिरेशन को बड़ा करो। आपके किरदार से लोग मुताशिर हो ना कि आपके पास कितना पैसा है इससे। आपका किरदार डॉन और गैंगस्टर भी पैसे कमाते हैं.अपने पिता की इस सीख की वजह से ग्लैमर इंडस्ट्री में रहने के बावजूद मैं शोशेबाजी से दूर रहता हूँ.सादगी में जिंदगी जीता हूँ क्योंकि खुदा ना ख्वास्ता अगर कभी बुरा वक़्त आये तो वह ज्यादा चोट ना पहुंचाए कम में भी गुजारा हो जाए.
पिता ने सजा देकर समय का पाबन्द बनाया
हमारे वक़्त में पेरेंटिंग अलग होती थी. तब समझाने के साथ साथ सजा भी दी जाती थी और वह बहुत काम करती थी. वह आपको बेहतर बनाती थी. हमारे घर में यह नियम था कि शाम ढलने के बाद आपको घर पर होना ही है. मैंने कुछ समय इसे नज़रअंदाज किया तो मेरे पिता ने मुझे अंडरगारमेंट्स में घर के बाहर खड़ा कर दिया था ताकि मैं समय का पाबन्द हो सकूँ. जिसके बाद मैं वक़्त का पाबन्द हो गया. जो अभी मेरे करियर में भी काम आता है.
बेहतर पिता बना हूँ
इस सीरीज ने पिता के तौर पर मुझ में समझदारी और ज्यादा पैदा की है. मेरी दो बच्चे हैं. एक बेटी और एक बेटा है. पेरेंटिंग में आप हर दिन सीखते हैं और बेहतर खुद बनाते हैं लेकिन इस शो से मैंने यह जाना कि आप रिश्तों को फॉर ग्रांटेड नहीं ले सकते हैं. पिता हैं तो आप गलतियां नहीं करेंगे.ऐसानहीं है. कई बार बच्चे नहीं बल्कि आप गलती करते हैं तो उस वक़्त आपको माफ़ी मांग लेनी चाहिए.इसके साथ ही मुझे पेरेंटिंग को लेकर यह भी लगता है कि हम वेस्ट की फिलॉसफी और आइडियलॉजी को बहुत मानते हैं. मुझे लगता है कि हमें अपने समाज के और दुनिया के अनुरूप अपने बच्चों को समझना और समझाना चाहिए.
