happy father’s day 2026:आज फादर्स डे पर सेलिब्रिटीज ने अपने पिता, बचपन की यादों के साथ -साथ फादरहुड से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों को साझा किया है.
मेरे पापा मेरी सबसे बड़ी ताकत -हर्षिता गौर
मिर्जापुर फेम हर्षिता गौर बताती हैं कि अपने पापा के बारे में मैं जितना बोलूँ, उतना कम है. वो सच में मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं.मैंने उनसे ज़्यादा मेहनती, धैर्यवान और नरम दिल इंसान नहीं देखा. मेरे लिए वो हमेशा इस बात की मिसाल रहे हैं कि एक पुरुष को कैसा होना चाहिए. मैंने उन्हें पूरी ज़िंदगी अपने परिवार के लिए मेहनत करते देखा है, लेकिन सबसे खूबसूरत बात ये है कि इतनी ज़िम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने परिवार को समय देना नहीं छोड़ा.मुझे आज भी याद है कि मेरे पापा मेरे स्कूल की यूनिफॉर्म तक प्रेस किया करते थे. घर में कभी ऐसा माहौल नहीं था कि ये काम सिर्फ मम्मी का है या ये सिर्फ पापा का. वो हर चीज़ में बराबर से शामिल रहते थे. शायद इसी वजह से मैंने रिश्तों में सम्मान, साझेदारी और प्यार को बहुत करीब से देखा है.जब मैंने घर पर कहा कि मुझे एक्टिंग करनी है, तब मेरे लिए सबसे पहले जो इंसान मेरे साथ खड़ा हुआ, वो मेरे पापा थे. मेरे माता-पिता डॉक्टर हैं और हमारा उस दुनिया से कोई संबंध नहीं था, लेकिन उन्होंने मुझसे सिर्फ इतना कहा, “अगर तू कोशिश करना चाहती है, तो मैं तेरे साथ हूँ ”और आज तक उन्होंने कभी मुझसे ये नहीं पूछा कि ये क्यों नहीं हुआ या वो क्यों नहीं हुआ। उन्होंने हमेशा बस मुझ पर भरोसा किया. मेरी ज़िंदगी में कोई भी मुश्किल आई हो, मेरे पापा ने हमेशा एक ही बात कही है — “मैं हूँ.”और सच कहूँ, किसी भी इंसान के लिए ये दो शब्द बहुत बड़ी ताकत होते हैं.इस फादर्स डे पर मैं बस इतना कहना चाहती हूँ कि आज मैं जो भी हूँ, उसमें मेरे पापा का बहुत बड़ा हाथ है. उनका भरोसा, उनका साथ और उनका प्यार मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है.पापा, आप हमेशा मेरे पहले हीरो रहेंगे.
पिता बनने के बाद अपने पिता की और कद्र करने लगा हूं -रोहित पुरोहित
सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है के अभिनेता रोहित पुरोहित के लिए फादर्स डे का एक खास महत्व है, क्योंकि हाल ही में उनके बेटे आरुष के जन्म के साथ उन्होंने पितृत्व की नई जिम्मेदारी और खुशी को अपनाया है. वह बताते हैं कि पिता बनना मेरी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक रहा है. जब से आरुष हमारी ज़िंदगी में आया है, वह अपने साथ अपार खुशी, प्यार और हर चीज़ को देखने का एक नया नज़रिया लेकर आया है. यह हैरान कर देने वाली बात है कि कैसे छोटे-छोटे पल—एक मुस्कान, एक नज़र, या बस उसे अपनी बाँहों में लेना—मेरा पूरा दिन बना देते हैं.यह फादर्स डे मेरे लिए और भी खास है क्योंकि इस बार मैं खुद एक पिता के रूप में इसे मना रहा हूँ. ये रिश्ता क्या कहलाता है की शूटिंग के दौरान भी मैं हर समय आरुष के बारे में सोचता रहता हूँ. सच कहूँ तो, पैक-अप के बाद जिस चीज़ का मुझे सबसे ज़्यादा इंतज़ार रहता है, वह है घर जाकर उसे अपनी बाँहों में लेना। पिता बनने के बाद मुझे अपने पिता की और भी ज़्यादा कद्र होने लगी है, और मैं बस यही उम्मीद करता हूँ कि मैं आरुष के लिए वैसा ही पिता बन सकूँ जैसा मेरे पिता मेरे लिए रहे हैं।”
पिता होने का मतलब बच्चों को जिम्मेदार बनाना होता है – राजन शाही
टेलीविज़न के प्रसिद्ध निर्माता राजन शाही एक बेटी के पिता हैं. इन दिनों उनकी बेटी इशिका भी उनके प्रोडक्शन हाउस में सक्रीय है. राजन शाही बताते हैं कि पिता होने का मतलब कभी भी अपने बच्चे को विशेषाधिकार या सुख-सुविधाएँ सौंपना नहीं रहा है।. इसके बजाय, उनका हमेशा यही मकसद रहा है कि उनकी बेटी अपने पैरों पर खड़ी होने के काबिल बने. इशिका ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आने की इच्छा जताई, तो राजन ने सोच-समझकर यह फ़ैसला किया कि सिर्फ़ इसलिए कि वह उनकी बेटी है, उसके सफ़र को आसान नहीं बनाया जाएगा. राजन ने बताया मैंने हमारे इनएक्टिव यू ट्यूब चैनल पर काम करने को कहा. इशिका नए आइडिया और एक विज़न के साथ आई कि इसे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है. लेकिन मैंने साफ़ कर दिया कि उसे टीम को रिपोर्ट करना होगा और बाकी लोगों की तरह ही अपने आइडिया पेश करने होंगे. मैं नहीं चाहता था कि उसके साथ कोई अलग बर्ताव हो. मैं चाहता था कि वह अपने काम के दम पर अपनी जगह बनाए.काम के अलावा पिता पुत्री की इस जोड़ी को जानवरों से खासा लगाव है.वह स्ट्रीट डॉग्स को साथ में मिलकर हर दिन खाना खिलाते हैं.
