Haiwaan Movie Review :इस थ्रिलर फिल्म में लेखन ही नहीं अक्षय कुमार भी बेदम

अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी 18 साल बाद हैवान से वापस आयी है लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले, खिंचा हुई रनटाइम और लचर ट्रीटमेंट उन्हें चमकने का मौक़ा नहीं देती है.अभिनय में अक्षय भी कमजोर साबित हुए हैं.

फिल्म - हैवान

निर्माता -केवीएन प्रोडक्शन

निर्देशक -प्रियदर्शन

कलाकार-अक्षय कुमार, सैफ अली खान, बोमन ईरानी, ​​श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर,असरानी और अन्य

प्लेटफार्म- सिनेमाघर

रेटिंग - दो

haiwan movie review :अक्षय कुमार और साउथ फ़िल्मों के रीमेक का फ़र्मूला एक वक़्त में सुपरहिट फार्मूला माना जाता था. यही वजह है कि अक्षय के नाम किसी भी बॉलीवुड हीरो के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा साउथ की हिंदी रीमेक फिल्में करने का रिकॉर्ड है,लेकिन बीते कुछ सालों से साउथ की रीमेक फ़िल्मों से जुड़ा अक्षय का तिलिस्म टूटता नज़र आया है .आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई फ़िल्म हैवान मलयालम की सुपरहिट फ़िल्म ओपम का हिंदी रीमेक है .क्या सुपरहिट फार्मूला फिर चल पड़ा है या ये साउथ रीमेक भी अक्षय कुमार स्टारर बैठ गई है.इसके लिए पढ़े यह रिव्यू

ये है कहानी

फ़िल्म की कहानी की बात करें तो फ़िल्म की शुरुआत एक हत्या से दिखायी जाती है ,जिसे करते हुए परशुराम (अक्षय कुमार) का किरदार नज़र आता है . उसके बाद कहानी नेत्रहीन श्याम ( सैफ अली ख़ान) पर पहुँच जाती है .वो भले ही देख नहीं सकता है लेकिन किसी को वह सूंघ कर और हल्की आवाज से पहचान सकता है.वह कुश्ती में भी माहिर है .मुंबई की एक पॉश बिल्डिंग का वह केयरटेकर है .उसी बिल्डिंग में एक रिटायर जज ( बोमन ईरानी) रहते हैं. वह श्याम के बेहद करीब हैं. रिटायर जज को जल्द ही इस बात को समझ लेता है कि परशुराम वही कैदी है ,जिसने सालों पहले उससे अदालती कार्यवाही के दौरान कहा था कि वह बेगुनाह है लेकिन सारे सबूत उसके खिलाफ थे. जिसकी वजह से जज को उसे सात सालों की सजा देनी पड़ती है. जिस वजह से उसका पूरा परिवार आत्महत्या कर लेता है . जिसके बाद परशुराम उन सभी लोगों के पूरे परिवार को मारने लगता है,जिन्होंने उसे सजा दी थी .जज को अपने से ज़्यादा अपनी बच्ची नंदिनी की चिंता है . क्या श्याम नंदिनी को परशुराम से बचा पाएगा.नंदिनी और परशुराम का भी एक खास कनेक्शन है . यही सब इस थ्रिलर की कहानी है .

हैवान फिल्म का पोस्टर, फोटो- इंस्टाग्राम

फिर चूके प्रियदर्शन

फ़िल्म 2016 में रिलीज हुई मलयालम की सुपरहिट फ़िल्म ऑपम का आधिकारिक रीमेक है. मलयालम की वह फ़िल्म कल्ट मानी जाती है लेकिन प्रियदर्शन को यह बात समझने की ज़रूरत थी कि फ़िल्म को रिलीज हुए एक दशक का समय बीत गया है. फ़िल्म के ट्रीटमेंट में बहुत बदलाव आ गया है. एक साइको थ्रिलर फ़िल्म का ट्रीटमेंट ग्रिपिंग होना चाहिए लेकिन इस फ़िल्म का लेंथ ओरिजिनल फ़िल्म के मुक़ाबले बढ़ा दिया गया है.जो इसका सबसे बड़ा माइनस पॉइंट है . हर बीस मिनट में एक गाना आ रहा है .प्रियदर्शन ने अपनी इस नई फ़िल्म को भी पुराना वाला ही ट्रीटमेंट दिया है.श्याम के किरदार से जुड़ा सब प्लॉट मैलोड्रामा वाला है . उसके बिना ये कहानी कही जा सकती थी.कॉमेडी के जो भी सीन्स हैं. राजपाल और असरानी के साथ.वह भी उनकी पुरानी फ़िल्मों का ही फील लिए हुए हैं .फ़िल्म के ट्रीटमेंट में थ्रिलर पॉइंट भी नदारद है . पर्दे पर जो कुछ भी चल रहा है. यह जो भी सस्पेंस रखा गया है . उसका आभास पहले से ही हो जाता है .फ़िल्म से लॉजिक भी ग़ायब है . परशुराम जिन लोगों से बदला ले रहा है . वह न्याय प्रणाली से जुड़े लोग हैं लेकिन वह आसानी से उनकी हत्या कर दे रहा है. किसी के घर की चाभी आसानी से उसे मिल जा रही है.पुलिस पूरी बिल्डिंग के लोगों के सामने पूछताछ कर रही है ताकि खूनी को अलर्ट कर सके.फ़िल्म में कंटीन्युटी की भी दिक्कत है . एक सीन में बारिश हो रही है. सभी भींगे हुए हैं लेकिन अगले ही पल अक्षय सूखे हुए कपड़ों में दिखते हैं.गीत संगीत में 90 की छाप है.

अक्षय कुमार भी बेअसर

अक्षय कुमार का फ़िल्म में स्क्रीन टाइम सैफ के मुक़ाबले भले कम हो लेकिन फ़िल्म में शीर्षक भूमिका उन्ही की है. फ़िल्म का शीर्षक डर और ख़ौफ़ से जुड़ा हुआ है लेकिन अक्षय का फ़िल्म में अभिनय डर से कोसो दूर है .अजीबोग़रीब उनके एक्सप्रेशन एक वक़्त के बाद हँसी पैदा करने लगते हैं .नन के कपड़े वाला लुक भी पर्दे पर दहशत नहीं ला पाया है .इस फ़िल्म से १८ साल बाद सैफ़ अली ख़ान और अक्षय कुमार की जोड़ी साथ नज़र आई हैं लेकिन कमज़ोर स्क्रिप्ट ने इस जोड़ी के जादू को चमकने का मौक़ा नहीं दिया. दोनों के बीच में जिस तनाव और टकराव की उम्मीद थी. वह कमजोर स्क्रिप्ट क्रिएट नहीं कर पायी है . सैफ अपनी भूमिका के साथ न्याय करते हैं लेकिन कुछ तो मिसिंग रह गया है. इससे भी इनकार नहीं है.बाक़ी के किरदारों को करने को कुछ ख़ास नहीं था . वेटेरन एक्टर असरानी की यह आख़िरी फ़िल्म कही जा रही है . पर्दे पर उन्हें देखना सुखद था.लेजेंडरी एक्टर मोहनलाल फिल्म के आखिर में झलक दिखा गए हैं.

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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.
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