पाकिस्तान से पिता का रिश्ता, भारत को बनाया अपना घर, आशा भोसले ने बचपन में पहचाना था इस सिंगर का हुनर

15 अगस्त को जन्मे इस मशहूर सिंगर की जिंदगी भारत और पाकिस्तान दोनों से जुड़ी रही है. बचपन में ही उनकी संगीत प्रतिभा देखकर आशा भोसले ने उनके हुनर को पहचान लिया था.

15 अगस्त का दिन भारत के लिए बेहद खास है. इसी दिन देश स्वतंत्रता दिवस मनाता है और इसी तारीख को मशहूर सिंगर अदनान सामी का जन्मदिन भी आता है. अपनी सुरीली आवाज और पियानो बजाने की शानदार कला के लिए पहचाने जाने वाले अदनान सामी ने संगीत की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई है. हालांकि, उनके जीवन की कहानी सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है. उनका परिवार भारत और पाकिस्तान दोनों से जुड़ा रहा है और उनके करियर की शुरुआत से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा दिग्गज गायिका आशा भोसले से भी जुड़ा है.

10 साल की उम्र में आशा भोसले ने पहचान लिया था हुनर

किस्सा उस वक्त का है जब अदनान सामी महज 10 साल के थे. लंदन में हुए एक कार्यक्रम में आशा भोसले भी मौजूद थीं. इसी दौरान नन्हे अदनान ने पियानो बजाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. इतनी कम उम्र में उनकी संगीत पर पकड़ देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए. आशा भोसले ने भी अदनान के इस हुनर को तुरंत पहचान लिया था. उनकी पियानो बजाने की कला और संगीत की समझ ने आशा भोसले को काफी प्रभावित किया. बचपन में ही उनकी प्रतिभा को पहचानना अदनान के आगे के सफर के लिए खास पल माना जाता है.

‘कभी तो नजर मिलाओ’ से मिली पहचान

समय के साथ अदनान सामी संगीत की दुनिया में आगे बढ़े और आशा भोसले के साथ भी काम किया. दोनों की आवाज ‘कभी तो नजर मिलाओ’ जैसे लोकप्रिय म्यूजिक प्रोजेक्ट में साथ सुनाई दी. इस एलबम के गानों को लोगों ने काफी पसंद किया और अदनान सामी की आवाज घर-घर तक पहुंच गई. बचपन में जिस प्रतिभा को आशा भोसले ने पहचाना था, आगे चलकर वही अदनान सामी की पहचान बन गई. पियानो पर उनकी पकड़ और उनकी अलग आवाज ने उन्हें दूसरे गायकों से अलग पहचान दिलाई.

भारत-पाकिस्तान से जुड़ी है परिवार की कहानी

अदनान सामी की जिंदगी का एक खास पहलू उनका भारत-पाकिस्तान कनेक्शन भी है. उनका जन्म 15 अगस्त 1971 को लंदन में हुआ था. उनके पिता पाकिस्तान से थे, जबकि उनकी मां जम्मू-कश्मीर से थीं. इस वजह से उनके परिवार की कहानी दोनों देशों से जुड़ी रही. बाद में अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता हासिल की और भारत को अपना घर बनाया. साल 2020 में उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्म श्री सम्मान भी दिया गया.

230 किलो वजन तक पहुंचा, फिर खुद को किया ट्रांसफॉर्म

अदनान सामी की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब उनका वजन काफी बढ़ गया था. एक समय उनका वजन करीब 230 किलो तक पहुंच गया था. इसके बाद उन्होंने अपनी फिटनेस पर गंभीरता से काम किया और काफी वजन कम किया. उनका यह बदलाव भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना. संगीत में सफलता के साथ अपनी फिटनेस पर काम करके अदनान ने यह दिखाया कि जिंदगी में बदलाव के लिए मजबूत इरादा जरूरी है.

आज भी कायम है अदनान सामी की पहचान

अदनान सामी ने अपने करियर में कई यादगार गाने दिए हैं. उनकी आवाज और पियानो बजाने का अंदाज आज भी उन्हें खास बनाता है. 15 अगस्त को जन्मे इस सिंगर की कहानी में संगीत, भारत-पाकिस्तान कनेक्शन और बचपन में मिली पहचान—तीनों पहलू इसे दिलचस्प बनाते हैं. सबसे खास बात यह है कि जिस प्रतिभा को आशा भोसले ने अदनान की कम उम्र में पहचान लिया था, उसने आगे चलकर उन्हें संगीत की दुनिया का जाना-पहचाना नाम बना दिया.

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By Nikita Singh

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