Sarzameen Movie Review: ‘चॉकलेटी बॉय’ से आतंकवादी बने इब्राहिम अली खान, काजोल- पृथ्वीराज की फिल्म देखकर दिमाग में आएगा ये सवाल

Sarzameen Movie Review: ‘सरजमीं’ एक ऐसी फिल्म है जिसे आप देखकर भूल नहीं पाएंगे आसानी से. ये आपके अंदर तक उतर जाती है. ये देशभक्ति, प्रेम और उस अनकही जमीन की कहानी है, जो सीधे दिल पर वार करती है. फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल, इब्राहिम अली खान ने काम किया हैं.

फिल्म- सरजमीं
निर्देशक: कायोज ईरानी
लेखक: सौमिल शुक्ला, कौसर मुनीर, अरुण सिंह
कलाकार: पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल, इब्राहिम अली खान
रेटिंग: 3.5

Sarzameen Movie Review: कायोज ईरानी की ‘सरजमीं’ रिलीज हो चुकी है. फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल, इब्राहिम अली खान ने अहम किरदार निभाया है. कश्मीर के अशांत और तनावग्रस्त परिवेश में बुनी गई यह फिल्म सीधे अपने केंद्रीय कथानक में प्रवेश करती है. पृथ्वीराज, कर्नल विजय मेनन की भूमिका में नजर आए हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी राष्ट्र की सेवा में लगा दिया है. उनकी पत्नी मेहर के रोल में काजोल नजर आई है. दोनों के बेटे के रोल में इब्राहिम दिखे हैं, जो देश के लिए एक गंभीर खतरा बन जाता है.

फिल्म में इब्राहिम अली खान ने अपने किरदार से चौंकाया

कर्नल विजय मेनन को एक सैन्य अभियान के दौरान पता चलता है कि उनका बेटा हरमन किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ गया है. मेहर ये जानकर भावनात्मक उथल-पुथल के भंवर में फंस जाती है. काजोल अपने किरदार में छा गई है और उनके चेहरे पर पीड़ा साफ दिखती है. पृथ्वीराज का अभिनय उस पिता की असहनीय वेदना को बखूबी दर्शाता है जो अपने बेटे के देशद्रोही बनने के विचार से जूझ रहा है. काजोल और पृथ्वीराज दोनों ने माता-पिता के रोल में शानदार प्रदर्शन किया है जो दर्शकों को अपनी ओर खींचता है. हालांकि सबसे ज्यादा जिसने दर्शकों को हैरान किया है वह है इब्राहिम अली खान हैं ने. इब्राहिम, हरमन के किरदार में क्रूर खलनायक दिखे है, जो एक ऐसे युवा के रूप में प्रस्तुत किया है जो किसी चीज पर विश्वास करने के लिए आतुर है. उनके चेहरे के हाव-भाव और उनकी डरावनी आंखें दर्शकों पर गहरा प्रभाव करेगी. एक ‘चॉकलेटी बॉय’ से एक गंभीर आतंकवादी बनकर उन्होंने चौंकाया है.

फिल्म देखने के बाद आपके दिमाग में आएगा ये सवाल

‘सरजमीं’ का लेखन अत्यंत धारदार है. ये एक ऐसी फिल्म है जिसे आप देखकर भूल नहीं पाएंगे आसानी से. ये आपके अंदर तक उतर जाती है. ये देशभक्ति, प्रेम और उस अनकही जमीन की कहानी है, जो सीधे दिल पर वार करती है. यह आपको ऋतिक रोशन की ‘मिशन कश्मीर’ और ‘फिजा’ जैसी फिल्मों की याद दिलाती है. इब्राहिम अली खान फिल्म के साथ एक बड़ी छलांग मार रहे हैं. काजोल और पृथ्वीराज का दमदार एक्टिंग यकीनन मूवी को खास बनाता है. फिल्म एक सवाल खड़ा करती है कि आप क्या करेंगे जब युद्ध का मैदान आपके अपने घर के भीतर हो ना कि बाहर. देश प्रेम और पुत्र प्रेम के बीच आप क्या चुनेंगे.

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