ऑस्कर में पहुंची शॉर्ट फिल्म चंपारण मटन, रांची के राम बाबू ने किया है अभिनय

रामबाबू प्रसाद ने फिल्म चंपारण मटन में छेदी चा का किरदार निभाया हैं. रामबाबू प्रसाद ने फिल्म चंपारण मटन में छेदी चा का किरदार निभाया हैं. उन्हें झारखंड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2021 में एक्सीलेंस अवार्ड मिल चुका है.

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के बैनर तले बनी फिल्म चंपारण मटन ऑस्कर की दौड़ में पहुंच गयी है. फिल्म सेमीफाइनल राउंड में पहुंच चुकी है. 24 मिनट की यह शॉर्ट फिल्म बज्जिका भाषा में बनायी गयी है, जिसका निर्देशन फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के छात्र रंजन उमा कृष्ण ने किया है. रंजन बिहार के वैशाली जिले के रहनेवाले हैं. वहीं बीआइटी मेसरा चौक के निवासी 63 वर्षीय रामबाबू प्रसाद ने किरदार निभाया है.

चंपारण मटन में बीआइटी मेसरा चौक के निवासी रामबाबू प्रसाद ने किया है काम

रामबाबू प्रसाद ने फिल्म चंपारण मटन में छेदी चा का किरदार निभाया हैं. राम बाबू झॉलीवुड और बॉलीवुड कलाकार हैं. करीब 30 फिल्में बना चुके हैं. 25 वर्षों से झॉलीवुड में योगदान दे रहे हैं. उनकी झॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों में कर्मा और चिंगारी शामिल है. यूनिसेफ से भी जुड़े रहे हैं. राजकीय बुनियादी विद्यालय मेसरा से 2021 में सेवानिवृत्त होनेवाले राम बाबू को झारखंड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2021 में एक्सीलेंस अवार्ड मिल चुका है. चंपारण मटन फिल्म में मटन के पीछे संघर्ष को दिखाया गया है. कैसे एक गर्भवती पत्नी को मटन खिलाने के लिए बेरोजगार पति को संघर्षों से गुजरना पड़ता है.

जानें क्या है चंपारण मटन की कहानी?

यह कहानी लॉकडाउन में आम आदमी की स्थिति को बयां करती है. चंपारण मटन की एक्ट्रेस फलक खान बताती हैं कि फिल्म की कहानी एक मध्यम वर्गीय परिवार और लॉकडाउन के दौरान उनके सामने आने वाली समस्याओं के इर्द-गिर्द घूमती है. जब कई लोगों की नौकरियां चली गईं तो जीवन जीना कितना कठिन हो गया. यह एक ऐसे युवक की कहानी है जो लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हो गया था, लेकिन अपनी व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद वह उस लड़की को ढूंढने की कोशिश करता है जिससे वह प्यार करता है. यह फिल्म रूरल बैक ड्रो पर आधारित है. ‘चंपारण मटन’ का मुकाबला उन 16 फिल्मों से होगा जो ऑस्कर स्टूडेंट एकेडमी अवॉर्ड के सेमीफाइनल राउंड में जगह बनाएंगी.

Also Read: Exclusive: कब आने वाला है पंचायत सीजन 3? फिल्म ‘चंपारण मटन’ फेम चंदन रॉय ने किया खुलासा, यहां जानिए

चंदन रॉय ने कही ये बात

प्रभात खबर से बातचीत में ‘चंपारण मटन’ के एक्टर चंदन रॉय ने बताया कि इस फिल्म से वो कैसे जुड़े. उन्होंने कहा, ये एफटीआइ की डिप्लोमा फिल्म थी. जो भी वहां स्टूडेंट होते हैं, उन्हें पासआउट होने से पहले एक फिल्म देनी पड़ती है. यह फिल्म रंजन कुमार की है. पंचायत के बाद मैं कुछ कमर्शियल फिल्में कर रहा था. जी की वेब सीरीज ‘जांबाज’ और एक सिटकॉम ‘मिसफिट’ से जुड़ा था. इसी बीच रंजन ने मुझे अप्रोच किया. मैंने रंजन को कहा कि फलाने डेट को कहानी सुना दीजिए. कहानी सही रही, तो आगे किया जायेगा. स्क्रिप्ट सुनने के बाद कहानी अच्छी लगी. काफी रियलिस्टिक थी. कैसे आदमी आधारभूत चीजों के लिए तरसता है. यह फिल्म स्टूडेंट ऑस्कर तक पहुंच गयी है, तो खुशी और बढ़ गयी है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Divya keshri

दिव्या केशरी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम की लीड के रूप में कार्यरत हैं. वह 2020 से प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी हुई हैं और तब से लगातार फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री की खबरों को कवर कर रही हैं. उनके पास लगभग 8 साल का जर्नलिज्म एक्सपीरियंस है. एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में उनकी मजबूत पकड़ फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बीटीएस अपडेट्स, थ्रोबैक स्टोरी, गॉसिप और ट्रेंडिंग एंटरटेनमेंट न्यूज पर है. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को आसान, भरोसेमंद और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि पाठक सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि खबर से जुड़ाव भी महसूस करें.

शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत

दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.

खबरों को लेकर सोच

दिव्या केशरी का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता सिर्फ मनोरंजन की खबरें देना नहीं, बल्कि पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और रोचक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिसकी मदद से वह किसी भी खबर की गहराई तक पहुंचती हैं. वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, Google Discover फ्रेंडली और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करती हैं, ताकि पाठकों को सही जानकारी आसानी से मिले और उनका पढ़ने का अनुभव बेहतर हो.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >