'बंटवारा 1947' के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र से जुड़ा एक इमोशनल किस्सा शेयर किया. उन्होंने बताया कि धरम जी ने फिल्म का नरेशन सुना था और वह इसे सुनकर काफी इमोशनल हो गए थे. उनकी आंखें नम हो गई थीं और उन्होंने पूरी टीम को दिल से अपना आशीर्वाद दिया था.
'Batwara 1947' Was Last Film Dharmendra Watched: धर्मेंद्र की आखिरी बार देखी गई फिल्म है बंटवारा 1947
राजकुमार संतोषी ने आगे कहा, "धरम जी का इस फिल्म पर हमेशा आशीर्वाद रहा है. मेरा मानना है कि उन्होंने आखिरी बार जो फिल्म देखी थी, वह भी 'बंटवारा 1947' ही थी. फिल्म देखने के बाद उन्होंने मुझसे कहा था, 'राज, ये पिक्चर बहुत चलेगी... तुम लोगों ने शानदार काम किया है.' आज मैं दिल से उनका आभारी हूं और इस मंच से उन्हें धन्यवाद कहना चाहता हूं."
Batwara 1947 Received 'A' Certificate: बंटवारा 1947 को मिला ए सर्टिफिकेट
ऐतिहासिक ड्रामा 'बंटवारा 1947' को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने बिना किसी कट के 'A' सर्टिफिकेट दिया है. सनी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, ''बंटवारा 1947' को CBFC ने बिना एक भी कट लगाए A सर्टिफिकेट दिया है. यह फिल्म इंसानियत और मोहब्बत की कहानी है. इसे 14 अगस्त, यानी पार्टिशन डे के मौके पर सिनेमाघरों में जरूर देखें."
बंटवारा 1947 की क्या है कहानी
फिल्म की कहानी बंटवारे के दौर में लाहौर पहुंचे एक मोहाजिर परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे रहने के लिए एक खाली हिंदू हवेली मिलती है, लेकिन उस घर की बुजुर्ग हिंदू महिला अपनी पुश्तैनी हवेली छोड़ने से साफ इनकार कर देती है. इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बनने वाले रिश्ते, टकराव और इंसानियत की मिसाल इस कहानी का सबसे मजबूत पहलू बनते हैं. यह फिल्म मशहूर लेखक सैयद असगर वजाहत के चर्चित नाटक 'जिस लाहौर नईं देख्या, ओ जम्या ई नईं' से प्रेरित है और इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर में उम्मीद और मानवता का संदेश देती है.
ये भी पढ़ें: Batwara 1947 Trailer: जलते घर, चीखते लोग और बिछड़ते रिश्ते... सनी देओल की फिल्म ने दिखाया 1947 के बंटवारे का दर्द
