‘अॅाक्सफोर्ड यूनियन’ में ट्विंकल खन्ना ने की ‘पैडमैन’ पर चर्चा, कहा पीरियड्स शर्म का कारण नहीं
बॉलीवुड अभिनेत्री और ‘पैडमैन’ फिल्म की प्रोड्यूसर ट्विंकल खन्ना ने ‘अॅाक्सफोर्ड यूनियन’ में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज भी हमारे देश में एक ‘बॉयोलॉजिकल टर्म’ को लेकर महिलाओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. मेरा इस फिल्म के जरिये यह प्रयास है कि महिलाएं पीरियड्स के दौरान हाइजीन के महत्व को समझें और माहवारी […]
बॉलीवुड अभिनेत्री और ‘पैडमैन’ फिल्म की प्रोड्यूसर ट्विंकल खन्ना ने ‘अॅाक्सफोर्ड यूनियन’ में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज भी हमारे देश में एक ‘बॉयोलॉजिकल टर्म’ को लेकर महिलाओं को शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. मेरा इस फिल्म के जरिये यह प्रयास है कि महिलाएं पीरियड्स के दौरान हाइजीन के महत्व को समझें और माहवारी को लेकर कोई शर्म महसूस ना करें, क्योंकि यह एक जैविक प्रक्रिया है.
https://twitter.com/OxfordUnion/status/954044058221019136?ref_src=twsrc%5Etfw
गौरतलब है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी भारतीय फिल्म पर अॅाक्सफोर्ड यूनियन में चर्चा हो रही है. ट्विंकल ने चर्चा में कहा कि मेरा उद्देश्य एक जैविक क्रिया के प्रति लोगों को जागरुक करना है. ताकि लोग स्वच्छता का महत्व समझें और ‘टैबू’ से बाहर आयें.
ट्विंकल खन्ना ने यहां अरुनाचलम मुरुगनांथम के बारे में भी बताया कि किस प्रकार एक स्कूल ड्रॉपआउट आदमी ने सेनेटरी नैपकिन के बारे में जाना और महिलाओं के लिए एक सस्ता पैड बनाया. किस तरह का संघर्ष उन्हें करना पड़ा. यह तमाम बातें इस फिल्म में दिखायीं गयी हैं.
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मात्र 12 प्रतिशत महिलाएं करती हैं सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग
हमारे देश में आज भी मात्र 12 प्रतिशत महिलाएं ही सेनेटरी नैपकिन का प्रयोग करती हैं. अधिकतर लोग कपड़ा, लकड़ी का बुरादा या फिर इसी तरह की किसी अन्य अनहाइजेनिक समानों का प्रयोग करती हैं. कई बार हाइजीन के प्रति यह लापरवाही महिलाओं में कई तरह की बीमारी का कारण बनती हैं, जिनमें योनि में संक्रमण, खुजली और बांझपन तक हो सकता है.
पीरियड्स को लेकर समाज में हैं कई ‘टैबू’
हमारे देश में पीरियड्स को लेकर आज भी कई ‘टैबू’ हैं. इस दौरान पूजा पर तो पाबंदी है ही कई अन्य अंधविश्वास भी समाज में हैं. मसलन अचार ना छूना, पूजा गृह, भंडार गृह में ना जाना, अलग-थलग रहना आदि शामिल है. आज भी लोग इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते हैं और अगर कोई इस विषय पर बात करे, तो यह कहने लगते हैं कि बकवास ना करें.