इस ”चमत्‍कार” के बाद रहमान ने कबूला था इस्‍लाम, जानें 10 दिलचस्‍प बातें…

‘सुरों के बादशाह’ संगीतकार ए.आर रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को हुआ था. उनका असली नाम दिलीप कुमार था, लेकिन बाद में उन्‍होंने अपना नाम बद‍ल दिया था. रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उनकी उम्र 23 साल थी तब उनकी बहन की तबीयत बेहद खराब हो गई थी तो वे […]

By Prabhat Khabar Print Desk | January 6, 2018 1:29 PM

‘सुरों के बादशाह’ संगीतकार ए.आर रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को हुआ था. उनका असली नाम दिलीप कुमार था, लेकिन बाद में उन्‍होंने अपना नाम बद‍ल दिया था. रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उनकी उम्र 23 साल थी तब उनकी बहन की तबीयत बेहद खराब हो गई थी तो वे पूरे परिवार के साथ इस्लामिक धार्मिक स्थल गईं. इसके बाद उनकी बहन स्वस्थ हो गई. इसका रहमान पर इतना असर हुआ कि उन्होंने धर्म बदलकर इस्लाम स्वीकार कर लिया. उन्होंने अपना नाम ‘अल्लाह रक्खा रहमान’ रख लिया और आज उन्‍हें दुनिया एआर रहमान के नाम से जानती है. उन्‍होंने भारतीय सिनेमा संगीत को अंतर्राष्‍ट्रीय पहचान भी दिलाई है. हिंदी के अलावा अन्य कई भाषाओं की फिल्मों में भी संगीत दिया है. रहमान को संगीत उनके पिता आरके शेखर मलयाली से विरासत में मिली. उनके पिता फिल्‍मों में संगीत देते थे. जानें उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्‍प बातें…

1. रहमान ने महज 11 साल की उम्र में दक्षिण फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार इल्‍लैयाराजा के समूह के लिये सिंथेसाइजर बजाने का कार्य करते थे. रहमान ने संगीत की शिक्षा मास्टर धनराज से प्राप्त की थी. रहमान पियानो, हारमोनियम और गिटार सभी बजाते थे.

2. रहमान जब नौ साल के थे तो उनके पिता की मृत्‍यु हो गई थी. घर की हालत खराब होने के कारण उन्‍हें उन्‍हें पैसों के लिए अपने वाद्य यंत्रों को भी बेचना पड़ा था.

3. रहमान को बैंड ग्रुप में काम करते हुए ही लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक से स्कॉलरशिप मिली थी जहाँ से उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में डिग्री हासिल की थी.

4. स्‍नातक की डिग्री प्राप्‍त करने के बाद उन्‍होंने घर में ही अपना एक म्‍यूजिक स्‍टूडियो खोला और इसका नाम पंचाथम रिकार्ड इन रखा. इस दौरान रहमान ने फिल्‍म इंडस्‍ट्री में पहचान हासिल करने के लिए लगभग एक साल तक कड़ी मेहनत की.

5. वर्ष 1992 उनके लिए एक अहम साल साबित हुआ. जानेमाने फिल्‍मकार मणिरत्‍नम ने उन्‍हें अपनी फिल्‍म ‘रोजा’ के लिए संगीत देने के लिए न्‍यौता दिया. फिल्‍म का म्‍यूजिक बेहद हिट रहा और पहली ही फिल्‍म में संगीत देने के लिए उन्‍हें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता.

6. आज वे विश्व के टॉप टेन म्यूजिक कंपोजर्स में गिने जाते हैं. उन्‍होंने ‘ताल’, ‘पुकार’, ‘फिजा’, ‘लगान’, ‘मंगल पांडे’, ‘स्वदेश’, ‘रंग दे बसंती’, ‘जोधा-अकबर’, ‘जाने तू या जाने ना’, ‘युवराज’, ‘स्लम डॉग मिलेनियर’ और ‘गजनी’ जैसी सुपरहिट फिल्‍मों में अपना संगीत दिया है.

7. रहमान ने जानेमाने कोरियोग्राफर प्रभुदेवा और शोभना के साथ मिलकर तमिल सिनेमा के डांसरों का एक ग्रुप बनाया जिसने माइकल जैक्‍सन के साथ मिलकर कई स्‍टेज परफॉरमेंस दिये. उन्होंने देश की आजादी की 50वीं वर्षगाँठ पर वर्ष 1997 में वंदे मातरम्‌’ एलबम बनाया जो सुपरहिट रहा और दर्शकों ने इसे खूब सराहा.

8. रहमान ने फिल्म ‘स्लमडाग मिलिनेयर’ में अपने संगीत के लिए दो बार ऑस्कर पुरस्कार जीतकर नया इतिहास रच दिया है. रहमान को अब तक बतौर संगीतकार दस बार फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जा चुका है. इसके अलावा उन्‍हें चार बार राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया जा चुका है.

9. रहमान की पत्नी का नाम सायरा बानो है. उनके तीन बच्चे हैं खदीजा, रहीम और अमन.

10. रहमान ने शास्त्रीय संगीत, कर्नाटक संगीत और आधुनिक संगीत का मिश्रण कर श्रोताओं को एक अलग संगीत देने का प्रयास किया. अपनी इन्‍हीं खूबियों कारण वे कई निर्माता-निर्देशकों के चहेते बन गये और उन्‍हें अपनी फिल्‍मों में संगीत देने के लिए पेशकश की.

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