Elections Results : कंगना रनौत और हेमा मालिनी की बड़ी जीत, महबूबा मुफ्ती और स्मृति ईरानी चुनाव हारीं

Elections Results : लोकसभा चुनाव में इस बार कई महिलाओं ने अपना परचम लहरा दिया है. हेमा मालिनी ने जहां जीत की हैट्रिक लगाई हैं वहीं कंगना ने पहली बार में ही सफलता पा लिया है.

Elections Results : लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित सामने आ गये हैं. कंगना रनौत और हेमा मालिनी ने लोकसभा चुनाव जीत लिया है. मंडी से कंगना ने 74 हजार वोटों से बड़ी जीत दर्ज की है. वहीं मथुरा से हेमा मालिनी ने हेट्रिक लगाते हुए तीसरी बार जीत दर्ज की है. हेमा मालिनी ने कांग्रेस के मुकेश धनगर को करीब तीन लाख वोटों से हरा दिया है. वहीं, चर्चित महिला उम्मीदवारों कुछ महिला चुनाव हार भी गई हैं. इनमें प्रमुख है अमेठी से स्मृति ईरानी, और अनंतनाग से महबूबा मुफ्ती. इसके अलावा सिंहभूम से गीता कोड़ा और दुमका से बीजेपी की सीता सोरेन भी चुनाव हार गई हैं. वहीं मैनपुरी से सपा की डिंपल यादव चुनाव जीत गई हैं. कृष्णानगर से टीएमसी की महुआ मोइत्रा भी जीत गई हैं. अमरावती से बीजेपी की नवनीत राण, बारामती से एनसीपी की सुप्रिया सुले ने भी जीत दर्ज की हैं.

महिला उम्मीदवारों की संख्या में लगातार वृद्धि

अगर आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा चुनाव लड़ने वाली महिला उम्मीदवारों की संख्या में 15 वर्ष में लगातार वृद्धि देखी गई है और यह संख्या 2009 में सात प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 9.6 प्रतिशत हो गई है. पिछले चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. यह आंकड़ा एडीआर की रिपोर्ट में सामने आया है. एडीआर के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष 797 महिलाएं मैदान में हैं, जो कुल 8,337 उम्मीदवारों का 9.6 प्रतिशत है. वर्ष 2019 में नौ प्रतिशत, 2014 में आठ प्रतिशत और 2009 में सात प्रतिशत महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2009 के लोकसभा चुनाव में 556 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में थीं, जो कुल 7,810 उम्मीदवारों का करीब सात प्रतिशत था. वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर 640 (8,205 का आठ प्रतिशत) हो गई और 2019 में 716 (7,928 का नौ प्रतिशत) हो गई.

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बीजेपी ने सबसे अधिक महिलाओं को दिया टिकट

महिला उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में बीजेपी सबसे आगे है, उसने अपने 440 उम्मीदवारों में से 69 महिलाओं को टिकट दिया है. जबकि कांग्रेस ने अपने 327 उम्मीदवारों में से 41 को टिकट दिया है. वहीं क्षेत्रीय दलों की बात करें, तो वे महिलाओं को टिकट देने में काफी उदार हैं. एडीआर के अनुसार महिला प्रतिनिधित्व वाले कुछ दलों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और बीजू जनता दल (बीजद) शामिल आगे हैं, जिनमें से प्रत्येक में 33 प्रतिशत, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में 29 प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं. समाजवादी पार्टी (सपा) में 20 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है, जबकि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में 25 प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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