सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG के जरिए मेडिकल एडमिशन में सामने आए फर्जीवाड़े के मामलों पर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी स्टूडेंट की धोखाधड़ी के कारण MBBS सीट खाली होती है, तो उसे खाली नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि मेरिट के आधार पर अगले योग्य कैंडिडेट को दी जानी चाहिए.
क्या है मामला?
यह केस NEET UG 2022 से जुड़ा है, जिसमें एक कैंडिडेट ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लिया था. बाद में जांच में फ्रॉड सामने आने के बाद उसका एडमिशन रद्द कर दिया गया, जिससे एक MBBS सीट खाली हो गई.
इस सीट पर असल में मेरिट लिस्ट में अगले नंबर वाले कैंडिडेट का हक था, लेकिन उसे समय पर एडमिशन नहीं मिला. इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां पहले हाईकोर्ट ने छात्र के पक्ष में फैसला दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि-
- MBBS सीट एक नेशनल रिसोर्स है
- इसे खाली छोड़ना गलत है
- फ्रॉड के कारण खाली हुई सीट को तुरंत अगले योग्य कैंडिडेट को दिया जाना चाहिए
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक देरी या लापरवाही के कारण सीट खाली रखना पूरी एडमिशन प्रक्रिया के खिलाफ है.
NMC को झटका
इस मामले में नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) ने फैसले को चैलेंज किया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी और छात्र के एडमिशन को बरकरार रखा.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने उन कैंडिडेट्स को बड़ी राहत मिली है, जिनका नुकसान इस तरह के किसी भी फ्रॉड से होता है. अब कोई भी मेडिकल सीट बेकार नहीं जाएगी. मेरिट के आधार पर सही कैंडिडेट को मौका मिलेगा. साथ ही एडमिशन प्रोसेस ज्यादा ट्रांसपेरेंट और फेयर बनेगा.
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