Shreya Gupta Success Story: UPSC 2025 के रिजल्ट में श्रेया गुप्ता ने ऑल इंडिया रैंक 114 हासिल की और कम उम्र में बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली. उनकी सफलता ने यह दिखा दिया कि सही दिशा में की गई मेहनत जल्दी भी रंग ला सकती है. हालांकि, उनको ये सफलता आसानी से नहीं मिली है. आइए श्रेया की जर्नी (Shreya Gupta Success Story) को करीब से देखते हैं.
Shreya Gupta Success Story: स्कूल से ही पढ़ाई में रही आगे
श्रेया गुप्ता का पढ़ाई में प्रदर्शन शुरू से ही शानदार रहा है. उन्होंने पानीपत के St. Mary’s Convent School से अपनी स्कूली पढ़ाई की. दसवीं में उन्होंने 99 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जबकि 12वीं में उनके 96.7 प्रतिशत नंबर आए.
इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित Lady Shri Ram College for Women से ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई के दौरान वह हर विषय को गहराई से समझने की कोशिश करती थीं, जिससे उनकी बेसिक समझ मजबूत हुई.
10-12 घंटे पढ़ाई और परिवार का साथ
UPSC की तैयारी के दौरान श्रेया रोजाना करीब 10 से 12 घंटे पढ़ाई करती थीं. उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग ली, लेकिन सबसे ज्यादा भरोसा खुद की पढ़ाई और नोट्स पर रखा. तैयारी के समय उन्होंने सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली ताकि ध्यान पूरी तरह पढ़ाई पर रहे.
उनकी मां पूनम गुप्ता और पिता रमेश गुप्ता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. परिवार के समर्थन ने उन्हें मुश्किल समय में भी आगे बढ़ने की ताकत दी. आज श्रेया गुप्ता की सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है.
UPSC का सपना
श्रेया ने बताया कि उन्हें सिविल सेवा के बारे में पहली बार तब पता चला जब वह दसवीं कक्षा में पढ़ रही थीं. उनके पिता ने उन्हें इस परीक्षा के बारे में बताया था. तभी से उनके मन में इस परीक्षा को पास करने का सपना बनने लगा.
बाद में जब वह कॉलेज में पहुंचीं तो उन्होंने इस दिशा में गंभीरता से तैयारी शुरू कर दी. ग्रेजुएशन के अंतिम साल में उन्होंने UPSC की तैयारी पर पूरा फोकस करना शुरू किया और अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हो गईं.
ऐसे मिली सफलता
ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद श्रेया ने पहली बार UPSC परीक्षा दी. हालांकि उस प्रयास में वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं. यह उनके लिए एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने इसे हार नहीं माना.
उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदला और कमजोरियों पर काम करना शुरू किया. अगले एक साल तक उन्होंने लगातार मेहनत की और पढ़ाई को अपनी पहली प्राथमिकता बना लिया. उसी का नतीजा रहा कि दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 114वीं रैंक हासिल कर ली.
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