UPSC Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में कई छात्र शामिल होते हैं. कुछ ऐसे होते हैं जो अपने पहले प्रयास में परीक्षा में सफलता हासिल कर लेते हैं. लेकिन कई ऐसे होते हैं, जिनके पास रिसोर्स और जानकारी की कमी होती है. कुछ ऐसी ही कहानी UPSC CSE 2025 के रिजल्ट में 508वीं रैंक हासिल करने वाले आदित्य सिंह की है. आदित्य एक बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं. उनके पिता किसान हैं. बहुत संघर्ष करने के बाद आदित्य ने अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की.
चार भाई-बहन, पढ़ाई से ज्यादा पेट पालना था जरूरी
आदित्य सिंह उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लालपुर गौहर गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता किसान हैं और मां हाउस वाइफ. आदित्य चार भाई-बहन हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनके सामने कई सारी चुनौतियां थीं.
न पेपर का आईडिया था न सिलेबस का
आदित्य ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें तो UPSC परीक्षा के पेपर और सिलेबस तक के बारे में जानकारी नहीं थी. उनका मानना है कि नए-नए स्टूडेंट हैं और अगर परिवार में जान-पहचान में दूर-दूर तक कोई सिविल सेवा में नहीं है तो गाइडेंस के लिए कोचिंग जरूरी है. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अब कोचिंग ऑनलाइन उपलब्ध है तो महंगे शहरों में जाकर रहना और पढ़ाई करना कोई जरूरी नहीं है. आप ऑनलाइन क्लासेज करके भी UPSC की परीक्षा क्रैक कर सकते हैं.
12वीं में देखा UPSC का सपना
12वीं क्लास से ही आदित्य ने ठान लिया था कि वे सिविल सेवा में जाएंगे. उन्हें अपने गांव और परिवार को देखकर ये फैसला लिया. उन्हें समझ आ गया था कि अगर समाज में या अपने परिवार के स्टेटस में बदलाव लाना है तो इसके लिए सिविल सेवा ही एकमात्र विकल्प है.
प्रयागराज से शुरू हुआ UPSC का सफर
पढ़ाई के लिए दिल्ली जाने का जब सोचा तो आदित्य के सामने सबसे मुश्किल चीज थी फीस और राष्ट्रीय राजधानी में रहने का खर्च. ऐसे में वे आजमगढ़ से प्रयागराज आए और यहां से तैयारी की. उन्होंने एक प्राइवेट कोचिंग ज्वॉइन किया. उनके कमरे से कोचिंग की दूरी करीब 7 किलोमीटर थी. लेकिन वे रोज 7 किलोमीटर तक साइकिल चलाकर ये दूरी तय करते थे.
2024 में दिया पहला अटेंप्ट, दूसरे में पाई सफलता
आदित्य ने अपना पहला अटेंप्ट 2024 में दिया था. लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. वहीं, दूसरे प्रयास में जी-जान लगाकर उन्होंने सफलता हासिल कर ली. वे रोजाना 8-9 घंटे की पढ़ाई करते थे.
पिता और परिवार ने हमेशा किया सपोर्ट
आदित्य के सामने मुश्किलें तो कई थी जैसे कि आर्थिक चुनौतियां, गाइडेंस की कमी आदि लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. साथ ही उनके पिता ने भी उन्हें सपोर्ट किया. उन्हें पूरे परिवार का सहयोग मिला.
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