Patil Manoj Ramchandra AIR 493: महारष्ट्र के सोलापुर जिले में एक छोटे से गांव जालिहल के रहने वाले हैं मनोज रामचंद्र पाटिल. मनोज ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया 493वीं रैंक हासिल की है. आइए मनोज की यूपीएससी की जर्नी को करीब से जानते हैं.
Patil Manoj Ramchandra AIR 493: एक साधारण परिवार और शुरुआती पढ़ाई
मनोज का परिवार बेहद साधारण है. उनके पिता एक रिटेन टीचर हैं और मां हाउसवाइफ हैं. मनोज ने अपनी चौथी तक की पढ़ाई गांव के ही जिला परिषद स्कूल से की. इसके बाद आगे की स्कूली शिक्षा रड्डे और सोलापुर से पूरी की. पढ़ाई में वह बचपन से ही बहुत होशियार थे. चौथी और सातवीं क्लास में उनका नाम डिस्ट्रिक्ट मेरिट लिस्ट में था. दसवीं में उन्होंने अपने तालुका में पहला स्थान हासिल किया था. इसके बाद उन्होंने संभाजीनगर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की.
पिता का सपना और एक लेक्चर से बदला जीवन
मनोज (Patil Manoj Ramchandra AIR 493) बताते हैं कि उनके मन में यूपीएससी का बीज उनके पिता ने ही बोया था. वह हमेशा कहते थे कि अगर पढ़ाई में अच्छे नंबर आ रहे हैं, तो सिविल सर्विसेज में जाना चाहिए. लेकिन यह सपना सच करने का पक्का इरादा इंजीनियरिंग के तीसरे साल में हुआ.
संभाजीनगर में पढ़ाई के दौरान मनोज ने आईएएस अधिकारी प्रवीण गेडाम का एक लेक्चर सुना. उनकी बातों ने मनोज को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का मन बना लिया. कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने तैयारी की योजना बनाई. इंजीनियरिंग के बाद कुछ समय एक रियल एस्टेट कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन जल्द ही नौकरी छोड़ पूरी तरह तैयारी में जुट गए.
Patil Manoj Ramchandra AIR 493: 6 प्रयास, 5 मेन्स और 3 इंटरव्यू का लंबा सफर
यूपीएससी का यह सफर मनोज के लिए आसान नहीं था. उन्होंने साल 2017 में अपना पहला प्रयास किया था. इस परीक्षा को पास करने के लिए उन्हें कुल 6 प्रयास करने पड़े. इस दौरान उन्होंने 5 बार मेन्स (Mains) परीक्षा दी और 3 बार इंटरव्यू तक पहुंचे. यही नहीं, उन्होंने इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के भी मेन्स और इंटरव्यू दिए थे. लगातार मिल रही असफलताओं के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और छठे प्रयास में 493 रैंक के साथ अपना सपना पूरा किया.
दिल्ली का सफर और तैयारी की रणनीति
मनोज ने अपनी तैयारी पुणे और दिल्ली में रहकर की. एक छोटे गांव से आने के कारण दिल्ली का खाना और मौसम उनके लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने खुद को ढाल लिया. शुरुआत में मेन्स परीक्षा में कम नंबर आने पर मनोज को समझ आ गया कि सिर्फ पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि आंसर लिखना सबसे जरूरी है. इसके बाद उन्होंने आंसर राइटिंग, ग्रुप डिस्कशन और सिलेक्टेड छात्रों से फीडबैक लेने पर पूरा फोकस किया, जिससे उनके नंबरों में बड़ा सुधार हुआ.
Patil Manoj Ramchandra AIR 493: इंटरव्यू का अनुभव
मनोज इस समय महाराष्ट्र सरकार के स्किल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट में बतौर असिस्टेंट एडवाइजर काम कर रहे थे. उनके इंटरव्यू में ज्यादातर सवाल उनके काम, सिविल इंजीनियरिंग, सड़कों के गड्ढे, वाटर कंजर्वेशन और सोलापुर के टूरिज्म से जुड़े थे. करीब 32 से 35 मिनट चले इस इंटरव्यू ने उनकी सफलता में बड़ी भूमिका निभाई.
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