IPS Bhanu Pratap Singh: UPSC की परीक्षा काफी कठिन होती है. इस परीक्षा में सफलता हासिल करना मुश्किल होता है. लेकिन भानुप्रताप सिंह ने एक बार नहीं बल्कि तीन-तीन बार UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल की. इन दिनों वे अपने पारिवारिक मामले को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने अपनी पत्नी पूजा से प्रेम विवाह किया था. लेकिन अब पत्नी उन पर गंभीर आरोप लगा रही हैं. पति-पत्नी का आपसी झगड़ा अब थाने पहुंच गया है.
यूपी के रहने वाले भानुप्रताप सिंह बिहार कैडर के IPS बने
IPS भानुप्रताप सिंह मूलरूप से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर जिले के रहने वाले हैं. हालांकि, इन दिनों उनका उनके परिवार के साथ राजस्थान के शहर भरतपुर के गीता कॉलनी में रहना हो रहा है. UPSC क्रैक करने के बाद उन्हें बिहार कैडर (Bihar Cadre IPS) मिला.
2105 में हुई पत्नी से मुलाकात, 2016 में प्रेम विवाह
2015 में भानुप्रताप की मुलाकात उनकी पत्नी से एक कार्यक्रम के दौरान हुई. दोनों ने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली. शादी के बाद भानुप्रताप की पत्नी ने एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया और परिवार को सहयोग किया. इधर, भानुप्रताप ने लगातार मेहनत के बाद UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर ली और IPS बन गए.
तीन बार क्रैक की UPSC परीक्षा
उन्होंने पहली बार परीक्षा पास कर Indian Railway Personnel Service (IRPS) के लिए चयन हासिल किया. इसके बाद दूसरी कोशिश में बेहतर रैंक के साथ Indian Audit and Accounts Service (IA&AS) में जगह बनाई. लेकिन उनका लक्ष्य इससे भी आगे का था. तीसरी कोशिश में उन्होंने UPSC क्रैक कर IPS बनने का सपना पूरा किया.
2020 में भानुप्रताप सिंह बने IPS
साल 2020 में उन्होंने लगातार तीसरी बार सिविल सेवा परीक्षा पास की. इस बार उन्होंने AIR 372 हासिल की, जिसके बाद उनका चयन इंडियन पुलिस सर्विस के लिए हुआ और उन्हें 2021 बैच के बिहार कैडर के IPS अधिकारी के रूप में सेवा का मौका मिला.
फिलहाल खगड़िया के SP हैं भानुप्रताप
UPSC में लगातार तीन बार सफलता हासिल करने वाले भानुप्रताप फिलहाल बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि पहली सफलता को मंजिल मानने के बजाय अपने लक्ष्य को लेकर लगातार मेहनत की जाए, तो बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.
भानुप्रताप की यात्रा उन UPSC अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो एक असफलता या पहली सफलता के बाद अपने बड़े लक्ष्य को छोड़ देते हैं. IRPS से IA&AS और फिर IPS तक का उनका सफर दिखाता है कि सही लक्ष्य, लगातार तैयारी और धैर्य के साथ बार-बार प्रयास करने से मंजिल तक पहुंचा जा सकता है.
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