Diamond Singh Dhruw Success Story: डायमंड सिंह ध्रुव के पिता बलराम सिंह हमेशा चाहते थे कि उनका बेटा देश की सेवा करे. लेकिन अप्रैल 2025 में उनके पिता का निधन हो गया. पिता के जाने के बाद भी डायमंड ने हिम्मत नहीं हारी और उनके सपने को पूरा करने में जुटे रहे. उनकी जर्नी (Diamond Singh Dhruw Success Story) काफी रोचक रही है आइए इसपर एक नजर डालते हैं.
Diamond Singh Dhruw Story: कौन हैं डायमंड सिंह घ्रुव?
डायमंड सिंह छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक के परसवानी गांव से आते हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरस्वती शिशु मंदिर में हुई. इसके बाद उन्होंने रायपुर के स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की.
आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी यानी BHU से BA (ऑनर्स) किया. फिर दिल्ली के जेएनयू से पोस्ट ग्रेजुएशन किया. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सर्विस में जाना है.
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दिल्ली में रहकर की तैयारी
एक इंटरव्यू में डायमंड (Diamond Singh Dhruw) ने बताया कि उन्होंने 2023 से UPSC की तैयारी शुरू की थी. वह दिल्ली में रहकर तैयारी कर रहे थे. वह रोज करीब 6 से 7 घंटे पढ़ाई करते थे. इसके साथ ही उन्होंने इंटरनेट का भी खूब इस्तेमाल किया. ऑनलाइन स्टडी मटेरियल, वीडियो और नोट्स की मदद से उन्होंने अपनी तैयारी को मजबूत बनाया.
तीसरे प्रयास में पास
डायमंड सिंह ने UPSC परीक्षा अपने तीसरे प्रयास में पास की. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 623 हासिल की. यह रैंक भले ही टॉप में न हो, लेकिन इसके पीछे की मेहनत और संघर्ष इसे खास बना देता है.
खास बात यह है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा भी पास कर ली थी और उन्हें DSP पद के लिए चुना गया था. हालांकि उन्होंने अभी तक जॉइन नहीं किया है.
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