कम हाइट की वजह से हुए रिजेक्ट, कोर्ट में लड़ी लड़ाई, गणेश बने डॉक्टर

Success Story: स्कूल से लेकर नीट के लिए अप्लाई करने तक गणेश को हर जगह अपनी हाइट के कारण संघर्ष करना पड़ा. स्कूल में उनके दोस्त उनका मजाक उड़ाया करते थे.

Success Story: किसी भी बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए मेहनत तो हर किसी को करनी पड़ती है, लेकिन कुछ लोगों की जिंदगी में चुनौतियां इतनी ज्यादा होती हैं कि उनका सफर और भी मुश्किल हो जाता है. गुजरात के गणेश बरैया की कहानी ऐसी ही है, जिन्होंने हर मुश्किल को पार कर MBBS डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया. फिजिकल डिस्बिलिटी और आर्थिक दिक्कतें के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज मेडिकल ऑफिसर बनकर दूसरों की सेवा कर रहे हैं.

पिता के कंधे पर बैठकर जाते थे स्कूल

गणेश बरैया मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं. उनकी लंबाई सिर्फ 3 फीट है और वजन करीब 20 किलो. बचपन से ही उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उनका प्राइमरी स्कूल घर से 5 किलोमीटर दूर था, जहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. कई बार जब वे थक जाते थे, तो उनके पिता उन्हें कंधे पर बैठाकर स्कूल ले जाते थे. यह सिलसिला पहली क्लास से 5वीं तक चला.

पिता का बड़ा फैसला

गणेश के पिता को सर्कस वालों ने 5 लाख रुपये में उन्हें देने का ऑफर दिया था. लेकिन उनके पिता ने इस ऑफर को ठुकरा दिया. बेटे को पढ़ाया लिखाया और उसकी हर जरूरत को पूरा किया.

स्कूल में बच्चे उड़ाते थे मजाक


स्कूल के दिनों में गणेश को उनकी हाइट को लेकर अक्सर मजाक का सामना करना पड़ता था. लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. असली चुनौती तब आई जब 12वीं के बाद उन्होंने NEET के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी विकलांगता के कारण उनका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया गया.

कोर्ट तक पहुंची लड़ाई

गणेश ने हार नहीं मानी और अपने हक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाई कोर्ट में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां फैसला उनके पक्ष में आया. इस फैसले ने उनके डॉक्टर बनने का रास्ता साफ कर दिया.

मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत

कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद गणेश ने MBBS की पढ़ाई पूरी की. आज वे भावनगर सिविल हॉस्पिटल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं और लोगों का इलाज कर रहे हैं. शुरुआत में हॉस्पिटल में भी गणेश को दिक्कत हुई. लेकिन काम और व्यवहार के कारण, मरीज अब उनसे अपना इलाज कराना चाहते हैं.

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Published by: Shambhavi Shivani

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