35 किलो वजन, जानलेवा बीमारी, संघर्ष के साथ पास की नीट परीक्षा

NEET Success Story: अनुराधा सिंह ने नीट यूजी परीक्षा में सफलता पाई है. उनका सफर लाखों NEET उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने के लिए मेहनत कर रहे हैं.

NEET Success Story: नीट यूजी जैसी कठिन परीक्षा को पास करना आसान नहीं होता, लेकिन मजबूत इरादों और सही स्ट्रैटजी से सफलता हासिल की जा सकती है. ऐसी ही मोटिवेशनल कहानी है अनुराधा सिंह की, जिन्होंने तमाम चुनौतियों के बावजूद NEET परीक्षा पास कर AIIMS देवघर में जगह बनाई.

प्रयागराज की बेटी ने किया कमाल

अनुराधा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक छोटे से गांव की रहने वाली हैं. अनुराधा एक साधारण परिवार से आती हैं. बचपन से ही उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना था. लेकिन वे 9वीं क्लास तक एक एवरेज स्टूडेंट थीं. लेकिन 9वीं कक्षा के बाद उनका कायापलट हुआ और उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की.

पहले प्रयास में हुईं असफल

अनुराधा ने 11वीं कक्षा से NEET UG परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी. लगातार मेहनत करने के बाद भी पहले प्रयास में उनके सिर्फ 442 मार्क्स आए थे. तब अनुराधा को धक्का लगा और उन्होंने अपनी स्ट्रैटजी बदली. NCERT किताबों को अपनी बेस मजबूत करने के लिए प्राथमिकता दी. इसके साथ ही उन्होंने नियमित रूप से मॉक टेस्ट और रिवीजन पर ध्यान दिया.

जानलेवा बीमारी ने किया अटैक

अनुराधा नीट की तैयारी के लिए कोटा शिफ्ट हो गईं. लेकिन उन्हें कहां पता था कि उनकी मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं. अनुराधा जब कोटा गईं तो इसी दौरान COVID-19 आ गया. गंभीर बीमारी की चपेट में आकर अनुराधा का वेट करीब 35 किलो रह गया था. अनुराधा बिस्तर पर थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

तीसरे प्रयास में पाई सफलता

पिता ने अनुराधा की हिम्मत नहीं टूटने दी और बीमारी से निकाला. अपने दूसरे प्रयास में अनुराधा ने 597 मार्क्स हासिल किया. आखिरकार तीसरे प्रयास में अनुराधा ने सफलता हासिल की और AIIMS देवघर में एडमिशन लिया.

अनुराधा की कहानी से मिल रही लाखों युवाओं को प्रेरणा

अनुराधा का कहना है कि NEET की तैयारी में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मेंटल स्ट्रेंथ और डिसिप्लिन भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित किया. उनकी इस सफलता में परिवार का भी अहम योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया और उन्हें मोटिवेट किया.

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Published by: Shambhavi Shivani

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