Mental Health: आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने शाॅर्ट फिल्म बनाकर समाज को दिया ये खूबसूरत मैसेज

Mental Health: छात्र खुद को अक्षम पाते हुए मानसिक तौर पर हार जाते हैं और मौत को गले लगा लेते हैं. हाल के वर्षों में आईआईटी व आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों के छात्रों के बीच निराशा में आत्मघाती कदम उठाने की प्रवृत्ति कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है.

Mental Health: एजुकेशन व बेहतर करियर बनाने की दौड़ में स्टूडेंट्स के ऊपर पेरेंट्स की उम्मीदों का बोझ जानलेवा साबित होता जा रहा है. हायर एजुकेशन के लिए बड़े संस्थानों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच मेंटल हेल्थ एक बड़ा इश्यू बनता जा रहा है. कई बार उम्मीदों व आकांक्षाओं को पूरा करने में छात्र खुद को अक्षम पाते है और मानसिक तौर पर हार जाते हैं परिणाम होता है आत्महत्या. हाल के वर्षों में आईआईटी व आईआईएम जैसे बड़े संस्थानों के छात्रों के बीच निराशा में आत्मघाती कदम उठाने की प्रवृत्ति कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. इन्हीं चिंताओं के बीच छात्रों में जागरूकता फैलाने व उन्हें मानसिक तौर पर मजबूत बनाने के लिए आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने एक शॉर्ट वीडियो बनाया है, जिसमें छात्रों को समझाया गया है कि मेंटल हेल्थ के इश्यू को हल्के में न लें.

कई तरह के तनाव

Mental Health: दीपांशु अमिताभ, क्रिश गोयल, वैभव सिंह, क्रिशन जांगीर, निर्मल रेवार की टीम के द्वारा बनाई गई इस वीडियो में इस बात को बहुत ही खूबसूरती से समझाया गया है. आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने बताया कि किस तरह पिछले पांच सालों में इन संस्थानों में सुसाइड के मामले बढ़े हैं. माता-पिता की उम्मीदों और समाज के दबाव में बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं. आजकल के छात्रों पर क्या गुजर रहा है ये बात समझना बहुत जरूरी है. किसी व्यक्ति के सर्वोत्तम विकास के लिए तनाव एक हद तक आवश्यक है और इसे वृद्धि और विकास के लिए एक सकारात्मक कारक माना जाता है. जैसा कि हम सभी जानते हैं, सभी तनाव अच्छे नहीं होते हैं और उचित समर्थन प्रणाली के बिना लंबे समय तक या उच्च तीव्रता वाला कोई भी तनाव हानिकारक या विषाक्त हो सकता है. विषाक्त तनाव और कुछ नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाला तनाव है जहां उड़ान या लड़ाई की प्रतिक्रिया बहुत जल्दी सक्रिय हो जाती है या लगातार थोड़ा ऊंचे स्तर पर बनी रहती है.जानते हैं प्रसिद्ध मनोचिकित्सक से तनाव के बारे में…

3 तरह के स्ट्रेस

डॉ प्रियंका कुमारी कहती है कि स्ट्रेस 3 तरह के होते हैं. सकारात्मक/तीव्र तनाव एक ऐसी चीज़ है जहां एक व्यक्ति उस विशेष तनाव से निपटने के लिए क्षमताओं और सहायता प्रणाली दोनों होती है. सहनीय/प्रबंधनीय तनाव तब होता है जब व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति (अनुभव/ज्ञान) से स्थिति को संभाल सकता है लेकिन उसके पास पर्यावरणीय समर्थन की कमी होती है. तीसरा है विषाक्त तनाव जो हानिकारक है. यह ज्यादातर विकृत सोच और व्यवहार के पैटर्न के कारण होता है.

Mental Health: ऐसे करें बचाव

  • समस्या की पहचान करें.
  • अपनी प्रबल भावना को पहचानें और अपनी भावनात्मक स्थिति को स्वीकार करें.
  • परिवार/दोस्तों से समर्थन की तलाश करें.
  • किसी चिकित्सक के पास पहुंचें- संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी और विश्राम तकनीक वास्तव में इन मामलों में चमत्कार कर सकती हैं.
  • अच्छी जीवनशैली अपनाएं (नींद, भोजन, व्यायाम, आराम).
  • किसी भी संभव तरीके से दूसरों के प्रति दयालु बनें और पीड़ित होने से बाहर आएं.
  • मदद लें, शर्माएं नहीं.. विषाक्त तनाव से उबरने में समय लग सकता है और बहुत प्रयास की आवश्यकता होती है, लेकिन यह निश्चित रूप से इसके लायक होगा और आपको अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ जीवन जीने में मदद करेगा.

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Author: Neha Singh

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