CBSE Supplementary Exam Rules: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं हो चुकी हैं. अब स्टूडेंट्स को रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है. ऐसे में कई स्टूडेंट्स के मन में सवाल रहता है कि अगर रिजल्ट अच्छा नहीं आए तो आगे क्या होगा. हालांकि, डरने की जरूरत नहीं है, CBSE बोर्ड सप्लीमेंट्री परीक्षा का ऑप्शन देता है. अब ऐसे में मन में ये सवाल आता है कि एक स्टूडेंट कितनी बार सप्लीमेंट्री परीक्षा दे सकता है. आइए, जानते हैं इस सवाल का जवाब.
क्या है CBSE की सप्लीमेंट्री परीक्षा?
बोर्ड परीक्षाओं में असफल होने वाले छात्रों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा एक बड़ा अवसर होती है. कक्षा 10वीं और 12वीं के ऐसे छात्र, जो एक या दो विषयों में पास नहीं हो पाते, उन्हें साल बर्बाद किए बिना अपनी गलती सुधारने का मौका दिया जाता है.
कितनी बार दे सकते हैं CBSE में सप्लीमेंट्री परीक्षा?
सप्लीमेंट्री परीक्षा को लेकर स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि इसे कितनी बार दिया जा सकता है. नियमों के अनुसार, छात्रों को पास होने के लिए कुल तीन मौके मिलते हैं.
पहला मौका उसी साल
बोर्ड परीक्षा के बाद उसी साल जुलाई या अगस्त में एक सप्लीमेंट्री परीक्षा होती है. स्टूडेंट्स के लिए यह सबसे अच्छा मौका होता है. आपने जितनी भी पढ़ाई की होती है, वो सब ताजा होता है. ऐसे में बहुत चांस होता है कि स्टूडेंट्स अच्छे नंबरों से पास हो जाए.
दूसरा मौका अगले साल मिलता है
अगर छात्र पहले अटेंप्ट में सफल नहीं हो पाता, तो उसे दूसरा मौका मिलता है. दूसरा मौका अगले साल फरवरी, मार्च या अप्रैल में होने वाली परीक्षा में मिलता है. यह अवसर नियमित बोर्ड परीक्षाओं के साथ आयोजित किया जाता है.
तीसरा और अंतिम मौका
इसके बाद भी यदि छात्र पास नहीं हो पाता, तो उसे तीसरा और अंतिम मौका उसी साल जुलाई या अगस्त में आयोजित होने वाली सप्लीमेंट्री परीक्षा में दिया जाता है.
यह भी पढ़ें- CBSE 10th Result 2026: पास होने के लिए चाहिए कितने नंबर? जानें क्या है ग्रेस मार्क्स रूल
