DU: डीयू आर्ट्स में वंदे मातरम हाॅल का हुआ शुभारंभ

दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) की फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में 'वंदे मातरम हॉल' का उद्घाटन किया गया. साथ ही हॉल के द्वार पर पूर्ण वंदे मातरम के शिलालेख का अनावरण भी किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीयू के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि वंदे मातरम हॉल सालों तक प्रेरणा का काम करता रहेगा. वंदे मातरम ने हर संकट में भारत का साथ दिया है.

DU: देश की आजादी में वंदे मातरम गीत का अहम योगदान रहा है. हाल में इस गीत के 150 साल पूरे होने पर राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया और संसद में भी इस मसले पर विशेष चर्चा हुई. इस गीत के महत्व को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) की फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में ‘वंदे मातरम हॉल’ का उद्घाटन किया गया. साथ ही हॉल के द्वार पर पूर्ण वंदे मातरम के शिलालेख का अनावरण भी किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीयू के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि वंदे मातरम हॉल सालों तक प्रेरणा का काम करता रहेगा.

वंदे मातरम ने हर संकट में भारत का साथ दिया है. मौजूदा समय में देश वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहा है. डीयू में वर्ष 1948 से लेकर 2005 तक कई कार्यक्रम आयोजित हुए और इसे राष्ट्रपति सहित अनेकों महान विभूतियों की ओर से संबोधित करने का काम किया गया है. जब भी डीयू का इतिहास लिखा जाएगा तो इस हॉल का इतिहास जरूर लिखा जाएगा. कुलपति ने कहा कि वर्ष  2021 में शंकर लाल हॉल, टैगोर हॉल और कॉन्वोकेशन हॉल काफी खराब स्थिति में थे और इसके नवीनीकरण का फैसला लिया गया. डीयू में जितने भी निर्माण व नवीनीकरण के काम चल रहे हैं वे सभी वर्ष 2027 तक पूरे हो जाएंगे. 

विरासत को बचाने की पहल 


देश की आजादी में डीयू का अहम योगदान रहा है. इसमें  फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के हॉल की भूमिका अहम रही है. इस हॉल को नये सिरे से बनाने के लिए वर्ष 1948 में आधारशिला रखी गयी. वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे होने पर इस हॉल का नाम वंदे मातरम हॉल किया गया है. लगभग 5 करोड़ रुपए की लागत इस हॉल को नये तरीके से तैयार किया गया है. विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार इस को पूरी तरह से नया बनाया गया है और इस हॉल में 688 लोगों के बैठने की क्षमता है.

नये हॉल में एयर कंडीशनिंग सहित बिजली कार्य एवं आधुनिक ऑडियो सिस्टम भी लगाया गया है. डीयू की कार्यकारी परिषद द्वारा पिछले साल 12 दिसंबर को फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में बने कॉन्वोकेशन हॉल का नाम नवीनीकरण के बाद वंदे मातरम हॉल रखने को मंजूरी दी गयी. इस पहल का मकसद आजादी के दौरान डीयू के प्रमुख स्थानों की विरासत को संजोना और आजादी में योगदान देने वाले नायकों और प्रतीकों को सम्मानित करना है.    

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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