CBSE History: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) आज देश का सबसे बड़ा स्कूल शिक्षा बोर्ड बन चुका है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले CBSE का नाम कुछ और था. साथ ही इस बोर्ड की शुरुआत आजादी से पहले ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी. आइए, जानते हैं सीबीएसई के इतिहास के बारे में.
क्या था CBSE का नाम?
सीबीएसई का पुराना नाम बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन, राजपूताना था. इसकी शुरुआत 1929 में हुई थी. CBSE का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है, जिसकी नींव ब्रिटिश शासन के दौरान रखी गई थी. यह बोर्ड मुख्य रूप से अजमेर, मेरवाड़ा, मध्य भारत और ग्वालियर के क्षेत्रों का मैनेजमेंट करता था. बाद में शिक्षा व्यवस्था के बदलाव के साथ इसका नाम भी बदला और यह नेशनल लेवल की परीक्षा बन गई.
समय के साथ हुए कई बदलाव
सीबीएसई (CBSE) का नाम 1952 में बदला गया था. CBSE ने समय के साथ अपने एग्जाम सिस्टम, डिजिटल शिक्षा और इवैल्यूएशन प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए हैं. हाल के वर्षों में बोर्ड ने ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मार्कशीट और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन जैसे कई नए सिस्टम भी लागू किए हैं. आज CBSE देशभर के हजारों स्कूलों को संबद्धता देता है और हर साल लाखों छात्र इसकी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं.
हाल ही में क्यों चर्चा में आई CBSE?
CBSE बोर्ड हाल ही में अपने 12वीं को रिजल्ट के लेकर चर्चा में आई. नियमों में बदलाव करते हुए CBSE ने 2026 से 12वीं की कॉपी चेकिंग को On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया. इसके तहत परीक्षकों ने फिजिकल कॉपी की बजाय आसंर कॉपी की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी चेक की. लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई स्टूडेंट्स शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें कम मार्क्स दिए गए हैं. कॉपियों की अदला-बदली की शिकायतें भी आई हैं.
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