Young Judge Success Story: IPS पति संग रहने की जिद, सीखी नई भाषा और निकिता बन गईं जज

Young Judge Success Story: प्यार में इतनी ताकत होती है कि वो करियर की राह भी बदल दे. यूपी की जज निकिता सेंगर ने साबित कर दिया कि दूरी चाहे हजारों किलोमीटर की हो, अगर इरादा पक्का हो तो भाषा, सिलेबस और जगह सब बदल सकते हैं. अपने आईपीएस पति के साथ रहने की जिद ने निकिता को जज बना दिया.

Young Judge Success Story: उत्तर प्रदेश की सिविल जज निकिता सेंगर की कहानी काफी दिलचस्प है. निकिता के पति तुहिन सिन्हा आईपीएस अधिकारी (IPS Officer) हैं और इस समय आंध्र प्रदेश में तैनात हैं. 2021 में शादी के बाद से ही दोनों ड्यूटी की वजह से अलग-अलग रह रहे थे. दूरी कम करने के लिए निकिता ने ऐसा कदम उठाया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी.

Young Judge Success Story: कौन हैं निकिता सेंगर?

निकिता और तुहिन दोनों लखनऊ के रहने वाले हैं. दोनों ने पुणे के आईएलएस लॉ कॉलेज से पढ़ाई की. पढ़ाई खत्म होने के बाद दोनों ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. निकिता ने 2018 में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा पास की और हरदोई में सिविल जज बन गईं. वहीं तुहिन आंध्र प्रदेश कैडर में आईपीएस अधिकारी बने. शादी के बाद दोनों ने सोचा था कि तुहिन का कैडर यूपी में बदल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

पति के साथ रहने का फैसला

पति का कैडर न बदलने पर निकिता ने खुद आंध्र प्रदेश जाकर उनके साथ रहने का फैसला लिया. इसके लिए उन्हें वहां की ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा पास करनी थी. सबसे बड़ी चुनौती थी तेलुगू भाषा सीखना और नए सिलेबस को समझना. निकिता ने मेहनत शुरू की, भाषा सीखी और पढ़ाई में पूरी ताकत लगा दी.

Rank 4 लाकर बनीं जज

लंबी तैयारी और मेहनत के बाद निकिता ने आंध्र प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा पास की और चौथा स्थान हासिल किया. इस सफलता से उन्हें न सिर्फ करियर में नई ऊंचाई मिली, बल्कि पति के साथ रहने का सपना भी पूरा हुआ. निकिता की कहानी बताती है कि अगर हिम्मत और लगन हो, तो कोई भी मुश्किल आसान हो सकती है.

निकिता सेंगर की यह कहानी (Success Story) न केवल प्रेम और समर्पण का उदाहरण है, बल्कि यह भी सिखाती है कि करियर और रिश्तों के बीच संतुलन बनाने के लिए साहसिक फैसले लेना जरूरी होता है.

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Author: Ravi Mallick

रवि मल्लिक, प्रभात खबर डिजिटल में सीनियर कंटेट राइटर हैं. सर्वविद्या की राजधानी कहे जाने वाले वाराणसी के रहने वाले हैं. यहीं से पढ़ाई की शुरुआत हुई. भारतेंदु हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज से स्कूलिंग खत्म करने के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद पत्रकारिता की ओर दिलचस्पी जगी और आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गए. स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान लखनऊ में रहकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और साल 2019 के लोकसभा चुनाव को करीब से देखा और एक लोकर वेबसाइट के साथ काम किया. डिजिटल युग में पत्रकारिता की शुरुआत होने के चलते रवि मल्लिक Digital News को अच्छे से समझते भी हैं और उसे तराशना भी जानते हैं. पॉलिटिक्स, क्राइम और बिग ब्रेकिंग खबरों पर हाथ साफ करने के बाद साल 2019 में रवि की रुचि एजुकेशन न्यूज की ओर हुई. अमर उजाला के सफलता प्लेटफॉर्म से उन्होंने एजुकेशन की खबरों पर काम करना शुरू किया. एजुकेशन न्यूज पर काम शुरू करने के साथ-साथ रवि के करियर की गाड़ी भी आगे चली. साल 2020 में उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल ज्वाइन किया और इस संस्थान में Career कैटेगरी की शुरुआत की. यहां करियर कैटेगरी पर काम करते हुए 3 साल पूरे कर लिए. साल 2024 में रवि मल्लिक Times Network के टाइम्सनाउ हिंदी के एजुकेशन टीम के साथ जुड़े. जॉब, स्कूली शिक्षा, बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट की खबरों पर काम करते हुए एक साल पूरा किया. साल 2025 से रवि प्रभात खबर डिजिटल की यंग और एनर्जेटिक टीम के साथ जुड़े हैं. रवि युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करेंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना पसंद करते हैं. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE, CUET और NEET जैसे कॉम्पिटेटिव एग्जाम इनके लिए स्मार्ट टिप्स तैयार करना अच्छा लगता है. एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में छात्रों को बताना पसंद है. कॉलेजों के बारे में डिटेल्स में बताना हो या किसी कोर्स की पूरी जानकारी रवि अच्छे से समझा सकते हैं. एजुकेशन न्यूज पर 7 साल का अनुभव रखने वाले रवि मल्लिक के लिए युवाओं को प्रेरित करना, उनके बीच के मुद्दों को उठाना, सही व सटीक जानकारी देना ही प्राथमिकता रही है.

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