BPSC 70th Exam 2026: बिहार में इस साल लंबे इंतजार के बाद 70वीं कंबाइंड परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ. इसमें 2000 से ज्याजा कैंडिडेट्स स्टेट सिविल सर्विस के लिए सेलेक्ट हो गए. लेकिन इस परीक्षा में नोटिफिकेशन जारी होने से लेकर फाइनल रिजल्ट तक कई उतार चढ़ाव देखने को मिले हैं. करियर की बात सीरीज में आइए BPSC 70वीं परीक्षा की पूरी कहानी को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं.
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पिछले डेढ़ साल में राज्य की सबसे चर्चित और सबसे विवादित परीक्षाओं में गिनी जाने लगी है. एक तरफ यह लाखों अभ्यर्थियों के करियर का सवाल था, तो दूसरी तरफ पेपर लीक के आरोप, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला और नेताओं की एंट्री ने इसे सुर्खियों में बनाए रखा.
क्या है BPSC 70वीं परीक्षा?
BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) राज्य में एसडीएम, डीएसपी, टैक्स ऑफिसर जैसे अहम प्रशासनिक पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा है. यह परीक्षा सामान्य दिनों की तरह शुरू तो हुई, लेकिन 13 दिसंबर 2024 को प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) के दिन ही पटना के एक केंद्र पर मची अफरा-तफरी ने इसे विवादों में डाल दिया.
BPSC 70वीं परीक्षा एक नजर में
| बिंदु | आंकड़ा/तथ्य |
| प्रीलिम्स परीक्षा तिथि | 13 दिसंबर 2024 |
| कुल परीक्षा केंद्र | 945 |
| कुल अभ्यर्थी (लगभग) | 5 लाख |
| विवादित केंद्र | बापू परीक्षा परिसर, पटना |
| बापू केंद्र पर अभ्यर्थी | करीब 12,000 |
| पुनर्परीक्षा तिथि | 4 जनवरी 2025 |
| पुनर्परीक्षा केंद्र | 22 |
| मुख्य परीक्षा (मेंस) | 25-30 अप्रैल 2025 |
| मेंस में शामिल अभ्यर्थी | 20,034 से अधिक |
| मेंस क्वालिफाई (इंटरव्यू के लिए) | 5,401 |
| फाइनल रिजल्ट तिथि | जून 2026 |
| कुल चयनित अभ्यर्थी | 2,035 |
13 दिसंबर की परीक्षा में क्या हुआ?
परीक्षा के दिन पटना के बापू परीक्षा परिसर से गड़बड़ी की खबरें आनी शुरू हुईं. अभ्यर्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र की सील पहले से खुली हुई थी और पेपर देर से मिला. मामला और बिगड़ा जब सामने आया कि एक परीक्षा हॉल में 288 प्रश्नपत्रों की जगह सिर्फ 192 प्रश्नपत्र ही पहुंचे, जिसके बाद दूसरे हॉल से पेपर मंगाना पड़ा. इसी दौरान परिसर में हंगामा शुरू हो गया और कई अभ्यर्थी प्रश्नपत्र व OMR शीट लेकर बाहर निकलते नजर आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
पटना डीएम की सूचना पर मौके पर पहुंचना और छात्रों को शांत कराने की कोशिश करना केंद्र के बाहर प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक अधिकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत होना आयोग की तरफ से शुरुआत में पेपर लीक के आरोपों को सिरे से खारिज करना छात्रों का यह दावा कि सिर्फ एक केंद्र नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
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नॉर्मलाइजेशन पर छात्रों का गुस्सा
पेपर लीक विवाद के साथ ही नॉर्मलाइजेशन का मुद्दा गरमाया. अभ्यर्थियों को आशंका थी कि अलग-अलग शिफ्ट और अलग-अलग केंद्रों पर परीक्षा होने की स्थिति में आयोग नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू कर सकता है, जिसे वे भेदभावपूर्ण मानते थे.
छात्रों का कहना था कि "एक शिफ्ट, एक पेपर" का सिद्धांत बना रहना चाहिए, ताकि सभी अभ्यर्थियों के साथ एक जैसा व्यवहार हो. आयोग सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आयोग ने नॉर्मलाइजेशन लागू करने के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन इसके बावजूद छात्रों का अविश्वास बना रहा और आयोग मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन जारी रहे.
डीएम की थप्पड़ और वायरल वीडियो
विवाद ने सबसे ज्यादा सुर्खियां तब बटोरीं जब पटना डीएम डॉ चंद्रशेखर सिंह ने प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी को थप्पड़ मार दिया. यह घटना 13 दिसंबर 2024 को ही बापू परीक्षा केंद्र के बाहर हुई, जब डीएम छात्रों को शांत कराने की कोशिश कर रहे थे. इसका वीडियो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया और छात्र को घटना के बाद पुलिस अपने साथ ले गई.
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प्रशांत किशोर और विपक्ष की एंट्री
जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, राजनीतिक दल भी इसमें कूद पड़े. राजद नेता तेजस्वी यादव ने पटना के गर्दनीबाग इलाके में प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर परीक्षा रद्द करने की मांग का समर्थन किया.
इस प्रदर्शन में मोड़ तब आया जब जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर 2 जनवरी 2025 से पटना के गांधी मैदान में परीक्षा रद्द कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गए. उनके समर्थन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे.
6 जनवरी 2025 की सुबह पटना पुलिस ने प्रशांत किशोर को गांधी मैदान से गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद शहर में तनावपूर्ण माहौल बन गया. इसके अलावा पटना हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि प्रदर्शनकारियों को भड़काने के आरोप में करीब 350 लोगों पर FIR दर्ज हुई और 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पटना के एक शिक्षक रामांशु मिश्रा भी शामिल थे.
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, रद्द करने की मांग
विवाद इतना बढ़ गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा. आनंद लीगल एंड फोरम ट्रस्ट नाम की संस्था ने याचिका दायर कर पूरी प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और सेवानिवृत्त जज की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग की.
याचिका में यह भी कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो. इसके समानांतर पटना हाईकोर्ट में भी सुनवाई चलती रही, जहां कोर्ट ने बिहार सरकार और आयोग को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.
सिर्फ एक केंद्र पर दोबारा परीक्षा
लगातार दबाव के बावजूद आयोग पूरी परीक्षा रद्द करने के पक्ष में नहीं था. आखिरकार आयोग ने बीच का रास्ता निकाला सिर्फ बापू परीक्षा परिसर के करीब 12,000 अभ्यर्थियों के लिए 4 जनवरी 2025 को 22 केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराई गई.
यह परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई. आयोग ने साथ ही करीब 30-40 अभ्यर्थियों को "असामाजिक तत्व" बताते हुए उनकी पहचान की और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से वंचित करने की चेतावनी दी.
जून में BPSC 70वीं का फाइनल रिजल्ट आया
लंबे आंदोलन, अदालती लड़ाई और राजनीतिक हंगामे के बीच आखिरकार जून 2026 में BPSC 70वीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ. आयोग अध्यक्ष रवि मनुभाई परमार ने रिजल्ट जारी करते हुए कहा कि परीक्षा को लेकर करीब तीन महीने आंदोलन चला, मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गया, फिर भी आयोग अपने फैसले पर कायम रहा और कोई पेपर लीक नहीं हुआ था.
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श्रद्धा पांडेय UP PCS क्रैक करने के बाद BPSC में टॉपर
बीपीएससी 70वीं परीक्षा में रैंक 1 लाने वाली श्रद्धा पांडेय यूपी के प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली हैं. श्रद्धा की स्कूलिंग से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई होम टाउन में ही हुई है. इसके बाद वो सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं.
BIPARD में ट्रेनिंग शुरू
मसूरी में जैसे IAS अफसरों को LBSNAA में ट्रेनिंग मिलती है, ठीक वैसे ही बिहार के अफसरों की ट्रेनिंग गया के BIPARD में होती है. बिपार्ड की डिटेल्स नीचे टेबल में देख सकते हैं-
| बिंदु | जानकारी |
| पूरा नाम | Bihar Institute of Public Administration & Rural Development (BIPARD) |
| स्थान | कुशदिहरा, पहाड़पुर, गया, बिहार |
| स्थापना का कारण | झारखंड अलग राज्य बनने के बाद बिहार को अपने अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए अलग संस्थान की आवश्यकता पड़ी. |
| तुलना | मसूरी के LBSNAA की तर्ज पर विकसित होने के कारण इसे "बिहार का LBSNAA" कहा जाता है. |
| कैंपस सुविधाएं | हाईटेक क्लासरूम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, खुला मैदान, हॉस्टल, मेस और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं. |
| किन्हें ट्रेनिंग मिलती है | BPSC से चयनित अधिकारी, SSC से चयनित ASO, सैनिटेशन अधिकारी, प्लानिंग असिस्टेंट, ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर, हॉर्टिकल्चर ऑफिसर समेत कई सरकारी अधिकारी. |
| ट्रेनिंग का पहला चरण | फाउंडेशन ट्रेनिंग, जिसमें प्रशासनिक नियम, फाइल वर्क, सरकारी प्रक्रियाएं और कानून-व्यवस्था की जानकारी दी जाती है. |
| अतिरिक्त एक्टिविटी | ट्रेकिंग, एडवेंचर कैंप, माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट विजिट और टीम बिल्डिंग गतिविधियां. |
| अन्य फोकस क्षेत्र | पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम, यूनिसेफ के साथ वर्कशॉप, पंचायती राज प्रतिनिधियों और स्थानीय निकायों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम. |
RDO पद पर सेलेक्टेड सृष्टि साह की जर्नी
फाइनल सेलेक्शन रद्द करने की मांग
रिजल्ट आने के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ. अगस्त 2026 में कुछ अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि सफल उम्मीदवारों में हिंदी माध्यम के छात्रों की हिस्सेदारी सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत के आसपास ही है, जबकि बिहार में ज्यादातर अभ्यर्थी हिंदी माध्यम से ही तैयारी करते हैं.
अभ्यर्थियों ने RTI से जुटाई जानकारी के आधार पर कॉपियों के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाया और संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन की मांग की. CPI-ML के विधायक संदीप सौरभ ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए आयोग से स्पष्टीकरण मांगा. आयोग की तरफ से अब तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है, और यह देखना बाकी है कि सरकार व आयोग इस पर क्या रुख अपनाते हैं.
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