Punpun River Flood Explained: बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच पुनपुन नदी भी उफान पर है. इसका असर अब पटना-गया रेलखंड पर भी दिख रहा है. पुनपुन और परसा बाजार के बीच रेलवे के ब्रिज नंबर-21 तक नदी का पानी पहुंच गया है.
पानी पुल के गर्डर को छूने लगा, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई. 6-7 सितंबर को इस वजह से 10 ट्रेनें रद्द की गईं और कई ट्रेनों के रूट में बदलाव करना पड़ा. लेकिन सवाल है कि आखिर पुनपुन में इतना पानी आया कहां से? हर साल मानसून में यह नदी अचानक इतनी उफनती क्यों है? इसे समझने के लिए पहले पुनपुन नदी को समझना होगा.
झारखंड से निकलकर बिहार में बहती है पुनपुन
पुनपुन गंगा की सहायक नदियों में से एक है. यह झारखंड के पलामू जिले के छोटानागपुर क्षेत्र से निकलती है. इसके बाद यह उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए बिहार के औरंगाबाद, गया, जहानाबाद और पटना के इलाकों से गुजरती है. आगे चलकर पटना के पास फतुहा में यह गंगा में मिल जाती है.
पुनपुन नदी में पानी आता कहां से है?
पुनपुन ऐसी नदी है जिसका पानी काफी हद तक बारिश पर निर्भर करता है. यानी मानसून में जितनी ज्यादा बारिश होगी, नदी में उतना ही ज्यादा पानी पहुंच सकता है. बारिश सिर्फ नदी के ठीक आसपास नहीं होती. आसपास के बड़े इलाके में जो पानी जमीन पर गिरता है, उसका काफी हिस्सा बहते-बहते छोटी धाराओं और दूसरी नदियों के जरिए पुनपुन में पहुंचता है.
फिर यही पानी बाढ़ कैसे बन जाता है?
इसे बहुत आसान तरीके से समझिए. मान लीजिए नदी में सामान्य दिनों में 100 हिस्से पानी आ रहा है और नदी उसे आसानी से आगे ले जा रही है. लेकिन बारिश के दिनों में अचानक पानी इससे कई गुना बढ़ जाए, तो नदी के लिए उसे संभालना मुश्किल होने लगता है.
पुनपुन के पूरे जलक्षेत्र में जून से सितंबर के बीच साल की करीब 85 प्रतिशत बारिश होती है. इसलिए मानसून में यहां पानी तेजी से बढ़ना स्वाभाविक है. मुश्किल तब शुरू होती है जब पानी की मात्रा नदी की सामान्य क्षमता से ज्यादा हो जाती है.
नदी की अपनी एक सीमा होती है. उसकी मुख्य धारा एक समय में जितना पानी आगे ले जा सकती है, उससे ज्यादा पानी आने पर जलस्तर ऊपर उठने लगता है. जब पानी नदी के किनारों तक पहुंच जाता है और वहां भी जगह नहीं बचती, तो वह आसपास के इलाकों में फैलने लगता है. यही स्थिति धीरे-धीरे बाढ़ का रूप ले लेती है.
गंगा का पानी बढ़ने से पुनपुन की परेशानी क्यों बढ़ती है?
इस बार स्थिति सिर्फ पुनपुन में आने वाले पानी की वजह से नहीं बिगड़ी है. गंगा का जलस्तर भी काफी ऊंचा है. यह बात पुनपुन की बाढ़ को समझने में बेहद अहम है. पुनपुन आगे जाकर गंगा में मिलती है.
सामान्य स्थिति में पुनपुन का पानी आगे बढ़कर गंगा में चला जाता है. लेकिन जब गंगा खुद बहुत ऊंचे स्तर पर होती है तो पुनपुन के पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है. यानी नीचे गंगा में पहले से ही बहुत पानी हो, तो पुनपुन का पानी भी आसानी से आगे नहीं निकल पाता है.
इस बार हालात इतने खराब क्यों हुए?
अब पूरी तस्वीर को एक साथ जोड़िए. पहले मानसून की बारिश हुई. आसपास के बड़े इलाके से पानी बहकर पुनपुन और उससे जुड़ी छोटी धाराओं में पहुंचा. नदी में पानी बढ़ता गया. एक समय के बाद नदी के लिए इतना पानी आगे ले जाना मुश्किल होने लगा.
इसी बीच गंगा का पानी भी काफी ऊपर है. इससे पुनपुन के पानी की निकासी पर असर पड़ा और आसपास के इलाकों में पानी फैलने लगा. रेलवे पुल तक पानी पहुंचना इसी बिगड़े हालात का बड़ा उदाहरण है.
यानी इस बार सिर्फ ज्यादा बारिश ही वजह नहीं है. बारिश से आया ज्यादा पानी और गंगा का बढ़ा हुआ पानी, दोनों ने मिलकर पुनपुन की स्थिति को ज्यादा गंभीर बना दिया है. फिलहाल नजर इस बात पर है कि पानी कब नीचे आता है और हालात कब सामान्य होते हैं.
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