IIT Bombay Cut Off 2026: टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है. इस बीच टॉप इंस्टीट्यूट IIT बॉम्बे के कटऑफ में बदलाव देखा गया है. हर साल की तरह इस बार भी कंप्यूटर साइंस (CSE) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे कोर ब्रांचेज की क्लोजिंग रैंक में बदलाव आया है. आइए कटऑफ में बदलाव के टॉप फैक्टर्स को समझते हैं.
पेपर का बदला हुआ मिजाज
कटऑफ ऊपर-नीचे होने की सबसे बड़ी वजह इस साल का JEE Advanced का पेपर था, पिछले सालों के मुकाबले इस बार परीक्षा का पैटर्न और सवालों का लेवल थोड़ा अलग रहा, खासकर मैथ्स और फिजिक्स के कुछ सवाल काफी घुमावदार थे, जब पेपर कठिन होता है, तो कम नंबरों पर भी अच्छी रैंक आ जाती है, इसी वजह से IIT बॉम्बे की सीटों के लिए कटऑफ रैंक में यह बदलाव देखने को मिला.
| ब्रांच का नाम (B.Tech Course) | पिछले साल का कटऑफ (2025 Closing Rank) | इस बार का कटऑफ (2026 1st Allotment) |
| कंप्यूटर साइंस (Computer Science & Engineering) | 68 | 62 |
| इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (Electrical Engineering) | 481 | 465 |
| मैकेनिकल इंजीनियरिंग (Mechanical Engineering) | 1234 | 1195 |
| एयरोस्पेस इंजीनियरिंग (Aerospace Engineering) | 2314 | 2250 |
| केमिकल इंजीनियरिंग (Chemical Engineering) | 2110 | 2080 |
| सिविल इंजीनियरिंग (Civil Engineering) | 3820 | 3750 |
स्टूडेंट्स की नई पसंद
आजकल स्टूडेंट्स सिर्फ पुरानी पारंपरिक ब्रांचेज के पीछे नहीं भाग रहे हैं. जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के दौरान देखा गया कि बच्चों ने डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग जैसे नए जमाने के कोर्सेज को जमकर चुना. IIT बॉम्बे ने भी अपने कोर्सेज को अपग्रेड किया है, जिससे इन नई फील्ड्स में तगड़ा कंपटीशन देखने को मिला और कटऑफ बदल गया.
सीटों का रिजर्वेशन
हर साल आईआईटी अपनी सीटों की संख्या और रिजर्वेशन पॉलिसी (जैसे लड़कियों के लिए सुपरन्यूमरेरी सीटें) में थोड़ा-बहुत बदलाव करता है. इस बार भी कुछ खास कोर्सेज की सीटों को री-स्ट्रक्चर किया गया था. जब भी किसी कैटेगरी या ब्रांच में सीटें कम या ज्यादा होती हैं, तो ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक पर उसका सीधा असर पड़ता है.
टॉपर्स की पहली पसंद
JEE Advanced के टॉप 100 बच्चों का पहला सपना हमेशा से IIT बॉम्बे का कंप्यूटर साइंस ही होता है, इस साल टॉपर्स के बीच मुकाबला इतना कड़ा था कि बस एक-दो नंबर के अंतर से रैंक बहुत पीछे चली गई. शुरुआती राउंड की काउंसलिंग में ही सीटें धड़ाधड़ फुल हो गईं, जिससे बाद के राउंड्स में कटऑफ काफी सख्त हो गया.
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