सरकारी अस्पतालों को 70,000 लीटर हैंड सेनिटाइजर देगी शराब कंपनी बकार्डी

शराब निर्माता कंपनी बकार्डी ने सोमवार को कहा कि वह 70,000 लीटर ‘हैंड सैनिटाइजर' का उत्पादन करेगी, जो मुख्य रूप से जिला सरकारी अस्पतालों में वितरित किया जाएगा, ताकि कोरोनोवायरस महामारी के फैलाव को कम करने में मदद मिले.

नयी दिल्ली : शराब निर्माता कंपनी बकार्डी ने सोमवार को कहा कि वह 70,000 लीटर ‘हैंड सैनिटाइजर’ का उत्पादन करेगी, जो मुख्य रूप से जिला सरकारी अस्पतालों में वितरित किया जाएगा, ताकि कोरोनोवायरस महामारी के फैलाव को कम करने में मदद मिले. बकार्डी लिमिटेड ने एक बयान में कहा कि कंपनी ने तेलंगाना में अपने को-पैकिंग सुविधाकेंद्र में इसका उत्पादन शुरू कर दिया है. उसने कहा कि कंपनी की उन अन्य राज्यों में भी इस काम को शुस् करने की योजना है, जहां उसकी सह-पैकिंग विनिर्माण सुविधाएं मौजूद हैं.

इसे भी पढ़ें : Fight against Coronavirus : पतंजलि और गोदरेज समेत FMCG कंपनियों ने हैंड सैनेटाइजर, लिक्विड हैंडवाश और साबुन के घटाए दाम

बयान में कहा गया है कि बकार्डी 70,000 लीटर हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन करेगी, जो मुख्य रूप से इन राज्यों के जिला सरकारी अस्पतालों में वितरित किया जाएगा. बयान में कहा गया है कि कंपनी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है, ताकि अस्पतालों को सैनिटाइजर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

कंपनी ने कोरोना वायरस संकट से निपटने में मदद के लिए दुनियाभर में 2,67,000 गैलन (11 लाख लीटर) से अधिक हैंड सैनिटाइजर के उत्पादन की प्रतिबद्धता जतायी है. कई शराब निर्माताओं ने मांग में आयी वृद्धि को पूरा करने के लिए हैंड सेनिटाइजर का निर्माण शुरू किया है. सरकार ने इसकी अनुमति दे रखी है.

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार, देश में 150 से अधिक डिस्टिलरी हैंड सैनिटाइजर का उत्पादन कर रही हैं. हाल ही में, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों को डिस्टलरी और चीनी कंपनियों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया था, ताकि मांग को पूरा करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का निर्माण किया जा सके. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में कोविड-19 मामलों की कुल संख्या 4,000 से ऊपर है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >