गुरुवार को लोकसभा में सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार अभी भी काफी उतार-चढ़ाव वाला बना हुआ है. ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटाने पर फिलहाल कोई संकेत नहीं दिया गया है.
सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों (PSU OMCs) को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. इसी वजह से कीमतों को लेकर फैसला आसान नहीं है.
ब्रेंट क्रूड सस्ता हुआ फिर क्यों नहीं घटे दाम?
सरकार ने बताया कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिला.
| तारीख | ब्रेंट क्रूड कीमत |
| 30 अप्रैल 2026 | 122.86 डॉलर प्रति बैरल |
| 2 जुलाई 2026 | 68.17 डॉलर प्रति बैरल |
| 21 जुलाई 2026 | 92.19 डॉलर प्रति बैरल |
सरकार का कहना है कि कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो रही हैं. इसलिए सिर्फ कुछ दिनों की गिरावट देखकर पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने का फैसला नहीं लिया जा सकता.
सरकार ने दाम कम करने पर क्या वजह बताई?
सरकार ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. मार्च 2026 के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ा. सरकार ने यह भी याद दिलाया कि मार्च 2026 में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपये प्रति लीटर घटाई गई थी. इसके चलते सरकार के टैक्स राजस्व (Revenue) पर बड़ा असर पड़ा. इसके अलावा, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर भारी नुकसान हुआ है. सरकार के अनुसार, इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम केवल मामूली बढ़ाए.
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