HR ने कहा- 'हम आपको खो नहीं सकते', दिया 90% हाइक; फिर 4 महीने बाद कर दिया टर्मिनेट, जानिए क्यों खतरनाक है काउंटर ऑफर

Counter Offer In Job: इस्तीफा वापस लेना पड़ा महंगा! 90% हाइक मिलने के बावजूद 4 महीने बाद कर्मचारी की छुट्टी. जानिए क्यों काउंटर ऑफर स्वीकार करना करियर के लिए जोखिम भरा हो सकता है.

Counter Offer In Job: इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक कर्मचारी ने ₹1 लाख की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर ₹1.70 लाख के ऑफर की ओर बढ़ने का फैसला किया. लेकिन जैसे ही उसने इस्तीफा दिया, कंपनी ने उसे रोकने के लिए ₹1.90 लाख का भारी-भरकम काउंटर ऑफर दे दिया. कर्मचारी रुक गया, लेकिन 4 महीने बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया.

आखिर हुआ क्या ?

जब कर्मचारी ने इस्तीफा वापस लिया, तो उसे लगा कि वह कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. लेकिन असल में कंपनी ने चतुराई से उसके लिए एक ‘असिस्टेंट’ हायर किया. कर्मचारी को लगा कि यह उसकी मदद के लिए है, लेकिन असल में वह उसका रिप्लेसमेंट था जिसे वह खुद ट्रेन कर रहा था. जैसे ही असिस्टेंट ने काम सीख लिया, कंपनी ने ‘रीस्ट्रक्चरिंग’ का बहाना बनाकर पुराने कर्मचारी को निकाल दिया. एक बार इस्तीफा देने के बाद, मैनेजमेंट की नजर में कर्मचारी की वफादारी (Loyalty) खत्म हो जाती है. कंपनी उसे तब तक रोकती है जब तक उसे कोई विकल्प न मिल जाए.

काउंटर ऑफर क्यों नहीं स्वीकार करना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि काउंटर ऑफर स्वीकार करने वाले 80% से ज्यादा लोग एक साल के भीतर नौकरी छोड़ देते हैं या निकाल दिए जाते हैं. इसके पीछे ये मुख्य कारण हैं.

  • समस्या का समाधान नहीं: आपने नौकरी क्यों छोड़ी थी? अगर कारण सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि खराब वर्क कल्चर या मैनेजर था, तो पैसा बढ़ने से वो समस्याएं खत्म नहीं होंगी.
  • बजट का गणित: कंपनी आपको जो एक्स्ट्रा पैसा दे रही है, वह अक्सर आपके भविष्य के बोनस या इंक्रीमेंट से ही काटा जाता है.
  • आप ‘महंगे’ हो जाते हैं: आर्थिक मंदी या छंटनी के समय, कंपनी सबसे पहले उन लोगों को निकालती है जिनकी सैलरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाई गई हो.

इस्तीफे के समय कैसे बरतें सावधानी?

स्पष्ट रहें: एक बार जब आप नया ऑफर लेटर साइन कर लें, तो पुराने संस्थान से पूरी शालीनता के साथ विदा लें.
भावनाओं में न बहें: “हम आपके बिना काम नहीं कर पाएंगे” जैसी बातें अक्सर प्रोफेशनल ‘मक्खन’ होती हैं. याद रखें, कोई भी व्यक्ति अपरिहार्य (Irreplaceable) नहीं होता.
एग्जिट इंटरव्यू: यहां अपनी नई सैलरी का खुलासा तभी करें जब आपको लगे कि इसकी जरूरत है, वरना भविष्य के लक्ष्यों पर ध्यान दें.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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