डिजिटल इंडिया में क्यों खत्म नहीं हो रही कागजी कार्रवाई? जानें eKYC की 5 बड़ी बातें

eKYC: क्यों बैंक मांगते हैं बार-बार दस्तावेज? डिजिटल इंडिया के ‘KYC रिपिटीशन’ के पीछे छिपे कानूनी पेंच और डेटा के खेल को समझें. जानिए क्यों एजेंसियां एक-दूसरे के वेरिफिकेशन पर भरोसा नहीं करतीं.

eKYC: भारत ने दुनिया का सबसे बेहतरीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है. आधार से लेकर डिजिलॉकर तक, सब कुछ आपकी उंगलियों पर है. लेकिन जब बात बैंक खाता खोलने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने या इंश्योरेंस लेने की आती है, तो वही पुराना ‘KYC’ का भूत सामने खड़ा हो जाता है.

सरकार ने 2016 में CKYC (सेंट्रल केवाईसी) पेश किया था ताकि एक बार वेरिफिकेशन के बाद आपको दोबारा दस्तावेज न देने पड़ें. लेकिन आज भी स्थिति यह है कि हर नई ऐप और हर नया बैंक आपसे वही आधार और पैन मांगता है. आखिर क्यों UPI जैसा चमत्कार KYC के मामले में नहीं हो पाया?

जिम्मेदारी का बोझ: “मेरा ग्राहक, मेरी जिम्मेदारी”

कानूनी तौर पर, कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान किसी दूसरे के द्वारा किए गए वेरिफिकेशन पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता.

  • स्वतंत्र जांच: हर संस्थान को PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के तहत अपनी खुद की ‘ड्यू डिलिजेंस’ करनी होती है.
  • जवाबदेही: अगर कल को कोई फ्रॉड होता है, तो बैंक यह नहीं कह सकता कि “मैंने CKYC के भरोसे खाता खोला था.” जिम्मेदारी उसी बैंक की होगी, इसलिए वे रिस्क नहीं लेते और खुद दोबारा KYC करते हैं.

रेगुलेटर्स के बीच तालमेल की कमी

भारत में अलग-अलग वित्तीय क्षेत्रों को अलग-अलग संस्थाएं संभालती हैं (जैसे बैंकों के लिए RBI, शेयर बाजार के लिए SEBI, इंश्योरेंस के लिए IRDAI).

  • मानकों में अंतर: सभी रेगुलेटर्स के KYC नियम और डेटा की गहराई अलग-अलग है. SEBI को जो जानकारी चाहिए, जरूरी नहीं कि RBI के पुराने डेटा में वह मौजूद हो.
  • सिस्टम का न जुड़ना: CERSAI (जो CKYC संभालती है) और SEBI के KRA (केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसी) के बीच डेटा शेयरिंग अभी भी पूरी तरह सुचारू नहीं है.

‘डेटा’ का असली खेल

विशेषज्ञों का मानना है कि KYC केवल कानूनी खानापूर्ति नहीं, बल्कि डेटा इकट्ठा करने का एक जरिया भी है.

  • कस्टमर प्रोफाइलिंग: कंपनियां आपकी डेमोग्राफिक जानकारी और व्यवहार को ट्रैक कर आपको नए प्रोडक्ट बेचने (Cross-selling) के लिए इस्तेमाल करती हैं.
  • अपडेटेड डेटा: बार-बार KYC करने से कंपनियों के पास आपका सबसे ताजा पता और मोबाइल नंबर रहता है.

CKYC की तकनीकी कमियां

सिद्धांत रूप में CKYC अच्छा है, लेकिन व्यवहार में इसमें कई कमियां हैं:

  • अधूरा डेटा: कई बार CKYC रजिस्ट्री में पुरानी फोटो या अधूरा पता होता है, जिसे संस्थान स्वीकार नहीं करते.
  • अपडेशन में देरी: अगर आपने एक जगह पता बदला, तो वह तुरंत पूरे सिस्टम (CKYC) में रिफ्लेक्ट नहीं होता, जिससे दोबारा वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है.

कैसे सुधरेगा यह सिस्टम ?

एक बेहतर और बिना रुकावट वाले सिस्टम के लिए ये 5 बदलाव जरूरी हैं:

  • यूनिफाइड फ्रेमवर्क: सभी रेगुलेटर्स (RBI, SEBI, IRDAI) के लिए एक जैसा KYC फॉर्म और नियम.
  • रियल-टाइम अपडेट: एक जगह जानकारी बदलते ही पूरे सिस्टम में खुद-ब-खुद अपडेट होना.
  • पोर्टेबिलिटी: जैसे मोबाइल नंबर पोर्ट होता है, वैसे ही ‘KYC पोर्टेबिलिटी’ होनी चाहिए.
  • डिजिलॉकर के साथ गहरा जुड़ाव: दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के लिए डिजिलॉकर और आधार का हर जगह अनिवार्य इस्तेमाल.
  • डेटा प्रोटेक्शन: DPDP एक्ट (डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन) का सख्ती से पालन ताकि बार-बार डेटा शेयर करने से स्पैम और फ्रॉड का खतरा न बढ़े.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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