Budget से पहले क्यों अहम होता है Economic Survey, कैसे तय करता है सरकार की दिशा

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक अहम सरकारी रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs– DEA) द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इसे सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन की निगरानी में तैयार किया जाएगा

By Abhishek Pandey | January 7, 2026 4:08 PM

Economic Survey: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश कर सकती हैं. बजट से ठीक पहले वित्त मंत्रालय द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) जारी किया जाता है, जिसे देश की अर्थव्यवस्था का “रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है. इस अवसर पर मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सर्वेक्षण की प्रमुख बातों को साझा करते हैं.

आर्थिक सर्वेक्षण क्या होता है?

आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक अहम सरकारी रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs– DEA) द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इसे सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन की निगरानी में तैयार किया जाएगा. इस रिपोर्ट में बीते वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है.

आर्थिक सर्वेक्षण का उद्देश्य क्या है?

आर्थिक सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकार, संसद और आम जनता को यह बताना होता है कि

  • देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है.
  • किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.
  • आगे के लिए नीतिगत सुझाव क्या हो सकते हैं.
  • यही कारण है कि बजट बनाने से पहले आर्थिक सर्वेक्षण को बेहद अहम माना जाता है.

आर्थिक सर्वेक्षण में क्या-क्या शामिल होता है?

आर्थिक सर्वेक्षण को आमतौर पर दो भागों – भाग A और भाग B में बांटा जाता है.

भागमुख्य विषय
भाग Aसालभर के प्रमुख आर्थिक घटनाक्रम
जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और राजकोषीय स्थिति
कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन
वैश्विक अर्थव्यवस्था का भारत पर प्रभाव
भाग Bसामाजिक सुरक्षा योजनाएं
गरीबी और असमानता
शिक्षा और स्वास्थ्य
मानव विकास
जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे

हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण और बजट दो अलग-अलग दस्तावेज हैं, लेकिन दोनों का आपस में गहरा संबंध होता है. आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए आंकड़े, विश्लेषण और सुझाव ही अक्सर आने वाले बजट की नीतियों और घोषणाओं की दिशा तय करते हैं.

पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण कब पेश किया गया था?

भारत में पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में जारी किया गया था. शुरुआत में यह दस्तावेज 1964 तक केंद्रीय बजट के साथ ही पेश किया जाता था, लेकिन बाद में इसे बजट से अलग कर बजट से पहले पेश करने की परंपरा शुरू की गई, ताकि बजट निर्माण में इसका बेहतर उपयोग हो सके.

आर्थिक सर्वेक्षण सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह सरकार की आर्थिक सोच, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति को भी दर्शाता है. निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए यह दस्तावेज देश की आर्थिक सेहत को समझने का सबसे भरोसेमंद स्रोत माना जाता है.

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