क्या है मैन्युफैक्चरिंग फंड, जिसमें लोगों का बढ़ रहा इंट्रेस्ट?

Manufacturing Fund: मैन्युफैक्चरिंग फंड चक्रीय और रक्षात्मक सेक्टरों में निवेश के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के एक क्रॉस-सेक्शन में निवेश करते हैं. इस तरह के फंड निवेश के मिले-जुले तरीके को अपनाते हैं.

Manufacturing Fund: अगर आप इक्विटी शेयर में सुरक्षित निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग फंड एक बेहतर विकल्प हो सकता है. मैन्युफैक्चरिंग फंड में सुरक्षित निवेश के लिए लोगों की दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ रही है. यह कंपनियों के साथ-साथ आम आदमी के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसका कारण यह है कि भारत में सर्विस सेक्टर के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी तेजी से विकास कर रहा है और सरकार का इस पर फोकस अधिक है. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विकास के लिए ही इस फंड की शुरुआत की गई है.

क्या है मैन्युफैक्चरिंग फंड

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2018 में मैन्युफैक्चरिंग फंड की शुरुआत की गई थी. अपने शुरुआत के दिनों से ही इस फंड ने लोगों को शानदार रिटर्न दिया है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस फंड ने एक, तीन और पांच साल की अवधि के निवेश पर 35.3 फीसदी, 34.7 फीसदी और 19.7 फीसदी का रिटर्न दिया है. यहां तक कि इस फंड ने एसएंडपी बीएसई इंडिया मैन्युफैक्चरिंग टीआरआई से 2.6 से 9.6 फीसदी से बेहतर परफॉर्मेंस दिया है. ये रिटर्न सभी कैटेगरी के इक्विटी फंडों में सबसे अच्छे हैं. वहीं, आदित्‍य बिरला सन लाइफ मैन्‍यूफैक्‍चरिंग फंड ने 1 साल में 18.95 प्रतिशत और 5 साल में 13.55 प्रतिशत का रिटर्न दिया है.

आपके पैसे का कैसे निवेश करते हैं मैन्युफैक्चरिंग फंड

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग फंड चक्रीय और रक्षात्मक सेक्टरों में निवेश के साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के एक क्रॉस-सेक्शन में निवेश करते हैं. इस तरह के फंड निवेश के मिले-जुले तरीके को अपनाते हैं, जिसमें वैल्यू और ग्रोथ का समावेश होता है. ये फंड सभी तरह के बाजार पूंजीकरण लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो के लिए मल्टी-कैप अप्रोच अपनाते हैं. बेहतरीन परिणाम के लिए टॉप-डाउन और बॉटम-अप स्टॉक सेलेक्शन मेथड के मिले-जुले तरीके को अपनाया जाता है. इस डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड में भी मैन्युफैक्चरिंग स्टॉक्स शामिल होते हैं.

मैन्युफैक्चरिंग फंड का बढ़ा है दायरा

2018 के बाद से देश में मैन्युफैक्चरिंग फंड का दायरा दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है. देश के सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के वित्तीय संस्थान मैन्युफैक्चरिंग फंड में निवेश का मौका देते हैं. इनमें आईसीआईसीआई और एसबीआई प्रमुख है. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मैन्युफैक्चरिंग फंड में निवेश का अवसर प्रदान करता है. इसका ट्रैक रिकॉर्ड काफी लंबा है. पिछले पांच साल में इसने 3.23 फीसदी से लेकर 48.55 फीसदी तक का रिटर्न दिया है.

कहां मिलता है मैन्युफैक्चरिंग फंड

एक्सिस इंडिया मैन्युफैक्चरिंग फंड: यह एक ओपन एंडेड इक्विटी स्कीम है. इसकी शुरुआत दिसंबर 2023 में की गई थी. इसने निवेशकों को करीब 12.20 फीसदी तक रिटर्न दिया है.

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आईसीआईसीआई प्रू मैन्युफैक्चरिंग फंड: इसकी शुरुआत अक्टूबर 2018 में की गई थी. इसने फरवरी तक करीब 23.83 प्रतिशत का सीएजीआर (सालाना एवरेज) रिटर्न दिया है. इस स्कीम के प्रमुख शेयरों में अल्ट्राटेक सीमेंट, लार्सन एंड टुब्रो, मारुति सुजुकी, आरआईएल और सन फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं.

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कोटक मैन्युफैक्चरिंग फंड इन इंडिया: यह स्कीम 10 सेक्टरों में निवेश करती है, जिनमें फार्मास्यूटिकल्स और लाइफ साइसेंज को सबसे अधिक महत्व दिया गया है. इसके बाद ऑटोमोबाइल, ऑटो कम्पोनेंट, इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का नंबर आता है. इसकी शुरुआत फरवरी 2022 में की गई थी, 25 फरवरी तक इसका रिटर्न लगभग 27.07 फीसदी रहा है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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