1 जुलाई से लागू होगी नई ग्रामीण रोजगार योजना, लेकिन झारखंड, बिहार और एमपी ने पेंच फंसा दिया

VB-G RAM G Scheme : 1 जुलाई से लागू होने वाली VB-G RAM G योजना क्या है? जानें MGNREGA से क्या बदलेगा, किन राज्यों ने आपत्ति जताई और इसका असर ग्रामीण रोजगार पर कैसे पड़ेगा.

VB-G RAM G Scheme : केंद्र सरकार 1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी’ यानी VB-G RAM G लागू करने की तैयारी है.

हालांकि, योजना लागू होने से पहले ही बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड ने इसके फंडिंग मॉडल पर चिंता जताई है. राज्यों का कहना है कि योजना के तहत 40 प्रतिशत खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं होगा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नई योजना से ग्रामीण रोजगार पर असर पड़ेगा और आगे क्या बदलाव हो सकते हैं.

VB-G RAM G Scheme क्या है?

VB-G RAM G केंद्र सरकार की प्रस्तावित ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका योजना है. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ आजीविका के नए अवसर तैयार करना है.

नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव फंडिंग पैटर्न को लेकर है.

फंडिंग मॉडल

खर्च उठाने वालाहिस्सेदारी
केंद्र सरकार60%
राज्य सरकार40%

यही 40 प्रतिशत हिस्सेदारी कई राज्यों की चिंता का मुख्य कारण बनी हुई है.

किन राज्यों ने जताई चिंता?

रिपोर्ट के अनुसार तीन राज्यों ने इस फंडिंग मॉडल पर सवाल उठाए हैं.

  • बिहार
  • मध्य प्रदेश
  • झारखंड

इनमें बिहार और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, जबकि झारखंड में अलग राजनीतिक दल की सरकार है. तीनों राज्यों ने केंद्र से फंडिंग पैटर्न पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

राज्यों की चिंता क्या है?

राज्यों का कहना है कि यदि उन्हें कुल खर्च का 40 प्रतिशत वहन करना पड़ा, तो 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराना वित्तीय रूप से कठिन हो सकता है.

अनुमानित वित्तीय बोझ

राज्यअनुमानित 40% हिस्सेदारीदावा
बिहारलगभग ₹4,477 करोड़125 दिन रोजगार के लिए पर्याप्त नहीं
मध्य प्रदेशलगभग ₹4,168 करोड़सीमित दिनों तक ही रोजगार संभव
झारखंडलगभग ₹1,804 करोड़अतिरिक्त बजट की जरूरत

NREGA संघर्ष मोर्चा का दावा है कि यदि 125 दिनों का रोजगार देना है, तो इन राज्यों को मौजूदा अनुमान से कई गुना अधिक राशि की आवश्यकता होगी.

दूसरे राज्यों ने क्या मांग रखी?

केवल तीन राज्यों ने ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य राज्यों ने भी अपनी चिंताएं सामने रखी हैं.

उत्तराखंड की मांग

उत्तराखंड ने अपने पहाड़ी क्षेत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाए या विशेष वित्तीय सहायता दी जाए.

सिक्किम का सुझाव

सिक्किम ने भी विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए 90:10 फंडिंग मॉडल बनाए रखने की बात कही.

मजदूरी भुगतान पर भी सवाल

कई राज्यों ने कहा कि

  • मजदूरी का भुगतान समय पर होना चाहिए.
  • सामग्री (Material) का भुगतान भी बिना देरी के हो.
  • नई योजना में भुगतान प्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी बनाई जाए.

इसका असर ग्रामीण मजदूरों पर कैसे पड़ सकता है?

यदि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलती, तो कुछ संभावित असर देखने को मिल सकते हैं.

  • रोजगार के दिनों में कमी आ सकती है.
  • नई परियोजनाओं की गति धीमी हो सकती है.
  • राज्यों पर अतिरिक्त बजटीय दबाव बढ़ सकता है.
  • मजदूरी भुगतान में देरी की आशंका बनी रह सकती है.

हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र और राज्यों के बीच फंडिंग को लेकर क्या सहमति बनती है.

क्या नई योजना से फायदा भी होगा?

यदि योजना पर्याप्त वित्तीय सहयोग और समय पर भुगतान के साथ लागू होती है, तो इसके कई संभावित लाभ हो सकते हैं.

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर.
  • आजीविका आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा.
  • ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास.
  • रोजगार के साथ कौशल विकास की संभावना.

आगे क्या हो सकता है?

योजना लागू होने से पहले राज्यों की मांगों पर केंद्र सरकार विचार कर सकती है. यदि फंडिंग मॉडल या अन्य नियमों में बदलाव होता है, तो राज्यों पर वित्तीय बोझ कम हो सकता है.

आने वाले दिनों में योजना के अंतिम दिशा-निर्देश और संचालन संबंधी विस्तृत जानकारी सामने आने की संभावना है.

Also Read : 8वें वेतन आयोग में बढ़ सकता है HRA, जानिए किसे मिल सकता है ₹73860 तक का फायदा 

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >