Vantara: वनतारा पर कितना खर्च करते हैं अनंत अंबानी? जानकर हैरान रह जाएंगे आप

Vantara: अनंत अंबानी का एनिमल वेलफेयर प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ जामनगर में 3000 एकड़ में फैला है, जहां सैकड़ों जानवरों की देखभाल होती है. इस पर हर साल 150-200 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. अनंत खुद इसकी मॉनिटरिंग करते हैं, इसे जानवरों का ताजमहल कहा जाता है.

Vantara: जब भी बात अंबानी परिवार की होती है, तो दिमाग में आते हैं आलीशान बंगले, लग्जरी गाड़ियां और अरबों की शादी. लेकिन अंबानी खानदान के सबसे छोटे वारिस अनंत अंबानी ने एक ऐसा काम किया है, जिसकी चर्चा अब इंसानों की नहीं, जानवरों की दुनिया में हो रही है.

‘वनतारा’, यानी “वन का तारा” ये नाम है उस भव्य एनिमल वेलफेयर प्रोजेक्ट का, जिसे अनंत अंबानी ने गुजरात के जामनगर में तैयार कराया है. करीब 3000 एकड़ में फैला यह केंद्र किसी पांच सितारा रिसॉर्ट से कम नहीं. यहां रहते हैं हाथी, शेर, तेंदुए, हिरण, कछुए, घोड़े और सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के जानवर.

अब सवाल ये कि इस ‘एनिमल पैलेस’ पर खर्च कितना होता है?

रिपोर्ट्स की मानें तो हर साल 150 से 200 करोड़ रुपये तक खर्च हो जाते हैं. जानवरों के लिए यहां है स्पेशल डाइट प्लान, इंटरनेशनल वेट डॉक्टर्स की टीम, एयर-कंडीशन्ड मेडिकल यूनिट्स, और मॉडर्न रिहैब सेंटर.

यहां सिर्फ इलाज नहीं होता, जानवरों को दोबारा जंगल जैसी आज़ादी दी जाती है. कुछ जानवर तो अफ्रीका, थाईलैंड और अमेरिका से रेस्क्यू करके यहां लाए गए हैं.अनंत अंबानी खुद इस प्रोजेक्ट पर बेहद एक्टिव रहते हैं. हर फैसले में उनकी सीधी भागीदारी होती है. वनतारा न सिर्फ एनिमल लवर्स के लिए एक मिसाल है, बल्कि यह बताता है कि पैसे से सिर्फ महल नहीं, जानवरों का घर भी बनाया जा सकता है.

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By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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