US-Iran तनाव से फिर महंगा होगा Crude Oil? एक्सपर्ट ने दी चेतावनी, पेट्रोल-डीजल पर पड़ सकता है असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि Brent Crude $110 प्रति बैरल तक जा सकता है. जानिए इसका भारत पर क्या असर होगा.

Crude Oil : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है. लगातार सैन्य कार्रवाई और ईरान के तेल निर्यात पर सख्ती के संकेतों के बीच एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है. इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है, जहां पेट्रोल-डीजल से लेकर महंगाई तक कई क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है.

क्यों बढ़ रही है Crude Oil की कीमत?

Singapore स्थित Sparta Commodities की सीनियर ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह के मुताबिक पिछले कुछ दिनों की घटनाएं साफ तौर पर बताती हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ा है.

उनके अनुसार.

  • ईरान की ओर से अमेरिकी जहाजों पर हमला.
  • जवाब में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई.
  • ईरानी तेल बिक्री पर छूट (Waiver) वापस लेना.
  • दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते के संकेत नहीं.

इन सभी वजहों से तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है.

Brent Crude फिर 110 डॉलर तक जा सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि संकट की शुरुआत में Brent Crude करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था.

यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहते हैं और कोई नया कूटनीतिक समझौता नहीं होता, तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आ सकता है.

हालांकि भविष्य की कीमतें पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेंगी कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है या बातचीत शुरू होती है.

Strait of Hormuz क्यों है सबसे बड़ी चिंता?

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में Strait of Hormuz की अहम भूमिका है. खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है.

अगर इस मार्ग पर सैन्य तनाव बढ़ता है.

  • तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.
  • शिपिंग कंपनियां जोखिम के कारण जहाज भेजने से बच सकती हैं.
  • वैश्विक तेल सप्लाई घट सकती है.
  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है.

OPEC+ की उत्पादन बढ़ोतरी से क्या राहत मिलेगी?

हाल के महीनों में OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने के संकेत दिए हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा.

यदि Hormuz Strait के जरिए तेल की सुरक्षित सप्लाई नहीं हो पाती, तो अतिरिक्त उत्पादन भी बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा. ऐसे में सप्लाई बाधित होने से कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं.

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

संभावित असर.

  • पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं.
  • LPG और ATF की लागत बढ़ सकती है.
  • परिवहन खर्च बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है.
  • खाद्य वस्तुओं और अन्य जरूरी सामान की कीमतों पर दबाव आ सकता है.
  • सरकार पर ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने का दबाव बढ़ सकता है.

आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?

आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा इन प्रमुख घटनाओं पर निर्भर करेगी.

  • अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या नहीं.
  • कोई नया कूटनीतिक समझौता होता है या नहीं.
  • Hormuz Strait में जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है या नहीं.
  • OPEC+ उत्पादन बढ़ोतरी का वास्तविक असर.
  • वैश्विक तेल सप्लाई और मांग का संतुलन.

यदि तनाव जारी रहता है, तो विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला कुछ समय तक जारी रह सकता है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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