Union Budget Big Idea: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को संसद के निचले सदन लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगी. इससे पहले सरकार ने देश के आम आदमी से बजट पर सुझाव मांगा है. अगर आप भी बजट पर अपना सुझाव देना चाहते हैं, तो आपको सरकार की आधिकारिक वेबसाइट MyGovIndia पर विजिट करना होगा. भारत सरकार आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को अधिक समावेशी और जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से आम जनता से सुझाव मांग रही है. MyGovIndia के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिकों को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है. सरकार का मानना है कि जनभागीदारी से नीतियां अधिक व्यावहारिक, संतुलित और विकासोन्मुख बन सकती हैं.
MyGovIndia के माध्यम से आमंत्रण
सरकार की आधिकारिक वेबसाइट MyGovIndia की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए एक पोस्ट में कहा गया, “जनता के सुझावों के आधार पर बजट तैयार करना. केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए अपने सुझाव साझा करें और समावेशी विकास और राष्ट्रीय प्रगति को बढ़ावा देने वाली नीतियों में योगदान दें.” इस संदेश के जरिए लोगों से MyGov वेबसाइट पर जाकर यह बताने को कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष के बजट में किन प्राथमिकताओं और क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए.
बजट-पूर्व परामर्श का सिलसिला जारी
पिछले महीने की शुरुआत में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 की तैयारियों के तहत नई दिल्ली में बजट-पूर्व परामर्श के कई दौर पूरे किए. इस प्रक्रिया की शुरुआत प्रमुख अर्थशास्त्रियों के साथ चर्चा से हुई, जहां आर्थिक हालात, विकास दर और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया.
किसानों, उद्योग और श्रमिक संगठनों से संवाद
इसके बाद किसान संगठनों और कृषि अर्थशास्त्रियों के साथ परामर्श किया गया, जिसमें कृषि आय, लागत, फसल बीमा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठे. आगे के सत्रों में एमएसएमई, पूंजी बाजार, स्टार्टअप्स, विनिर्माण, बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा), सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया. अंत में ट्रेड यूनियनों और श्रम संगठनों से श्रमिक हितों, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा हुई.
उद्योग संगठनों के प्रमुख सुझाव
दिसंबर महीने की शुरुआत में विभिन्न उद्योग संगठनों ने भी बजट से पहले अपने सुझाव सरकार को सौंपे. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए आसान कर व्यवस्था, सस्ता ऋण और सरल नियमों की मांग की. प्रस्तावों में आयकर सुधार, बैंक ऋण की उपलब्धता, निर्यात समर्थन और इक्विटी फंडिंग में बदलाव पर जोर दिया गया, ताकि छोटे और मध्यम उद्यम कम लागत और कम देरी के साथ व्यवसाय चला सकें.
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आर्थिक पृष्ठभूमि और आगे की प्रक्रिया
यह बजट मजबूत जीडीपी आंकड़ों और नियंत्रित मुद्रास्फीति की पृष्ठभूमि में तैयार किया जा रहा है. परंपरा के अनुसार, केंद्रीय बजट हर साल 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है. उससे पहले वित्त मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न हितधारकों के साथ पूर्व-बजट बैठकों की यह शृंखला बजट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सर्वसमावेशी बनाने में अहम भूमिका निभाती है.
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