Union Budget 2023 : 1 फरवरी को पेश होगा देश का बजट, जानें क्या है बजट और कैसे किया जाता है इसका निर्माण

आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि जो बजट फरवरी माह में प्रस्तुत हो रहा है उसको बनाने की प्रक्रिया अगस्त-सितंबर महीने से शुरू हो जाती है.

Union Budget 2023 : एक फरवरी को देश का आम बजट पेश किया जायेगा. यह बजट वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए होगा. जब भी बजट का समय आता है, कई लोगों के मन में यह सवाल खड़े होते हैं कि आखिर बजट क्या होता है और इसके निर्माण की प्रक्रिया क्या है? हम आपको इस आलेख के जरिये बहुत ही आसान शब्दों में यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि बजट क्या है और इसका निर्माण कैसे होता है.

बजट क्या है?

बजट का अर्थ है आय-व्यय का ब्यौरा. वित्तीय वर्ष 2023-24 में क्या खर्च होना है और देश को आय कहां से होगा, इसकी पूरी जानकारी बजट में दी जायेगी. किसी देश के बजट में इसी बात का प्रावधान होता है. अगर हम अपने घर में भी कोई छोटी सी योजना बनाते हैं तो उसका बजट तैयार किया जाता है. पैसा किस मद में खर्च होगा, उसके लिए पैसे कहां से आयेंगे, इन बातों का पूरा ध्यान रखा जाता है. वैसे ही एक देश का बजट भी तैयार किया जाता है.

कैसे तैयार किया जाता है बजट

बजट तैयार करने की प्रक्रिया काफी गोपनीय होती है. इस प्रक्रिया में जो लोग मुख्य रूप से जुड़े होते हैं वे योजना आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, प्रशासनिक मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय के होते हैं. आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि जो बजट फरवरी माह में प्रस्तुत हो रहा है उसको बनाने की प्रक्रिया अगस्त-सितंबर महीने से शुरू हो जाती है. वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग में एक बजट प्रभाग होता है, जो सभी मंत्रालयों, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों, स्वायत्त निकायों और रक्षाबलों को सर्कुलर जारी करता है. जिसमें उनसे आगामी वित्तीय वर्ष में उनके खर्चे का अनुमान करते हुए उनसे जरूरी फंड बताने के लिए कहा जाता है. फिर उस अनुमानित खर्चे पर चर्चा होती है. उसके बाद बजट प्रभाग राजस्व विभाग, उद्योग संघों, वाणिज्य मंडलों, किसान संघों, ट्रेड यूनियनों, अर्थशास्त्रियों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट से सलाह और चर्चा करते हुए बजट का प्रावधान तैयार करते हैं.

वित्तमंत्री बजट पर प्रधानमंत्री से करते हैं परामर्श

बजट तैयार हो जाने के बाद वित्तमंत्री उसकी जांच करते हैं. साथ ही वित्तमंत्री बजट में आवश्यक संशोधन भी करते हैं. तैयार बजट पर वित्तमंत्री प्रधानमंत्री की सलाह लेते हैं और जरूरी हुआ तो बजट में संशोधन भी किया जाता है. वित्तमंत्री केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी सलाह लेते हैं. जरूरी संशोधनों के बाद बजट का फाइनल स्वरूप तैयार किया जाता है और उसे स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लोकसभा में बजट प्रस्तुत किया जाता है.

बजट का उद्देश्य क्या है

भारत में एक लोककल्याणकारी सरकार है, जिसका उद्देश्य देश की जनता का विकास करना है. इसके लिए सरकार अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार से हस्तक्षेप करती है. इसके लिए सरकार इनकम के साधन बढ़ाते हुए अलग-अलग स्कीम के लिए फंड रिलीज करती है. साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए भी सरकार योजनाएं बनाती हैं. नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने के लिए सरकार उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का कार्य करती है. साथ ही नागरिकों की आर्थिक स्थिति में सुधारने के लिए गरीबी और बेरोजगारी को कम करने के लिए भी योजनाएं बनाती है.देश में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देना भी सरकार के मुख्य काम में से एक है और इसके लिए सरकार बजट में प्रावधान करती है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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