Sugar Price Hike: भारत में चीनी 55 रुपये के पार, सरकार ने रेड रॉट और एल्निनो को ठहराया जिम्मेदार; विपक्ष ने एथेनॉल पर घेरा

Sugar Price Hike: देश में त्योहारों से ठीक पहले आम आदमी की जेब पर महंगाई की नई मार पड़ी है. पिछले एक महीने के भीतर खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. चीनी के दामों में आई इस अचानक तेजी ने केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है.

Sugar Price Hike: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को जो चीनी 48.18 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है.

सरकार का दावा: रेड रॉट बीमारी और एल्निनो से प्रभावित हुआ उत्पादन

चीनी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने स्पष्ट किया कि गन्ना उत्पादन में आई गिरावट के पीछे मुख्य रूप से 'रेड रॉट' (लाला सड़न) बीमारी और 'एल्निनो' (El Nino) जैसे मौसमी कारक जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है.


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20 से 25 लाख टन का सरप्लस स्टॉक मौजूद : केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत की वार्षिक चीनी आवश्यकता लगभग 280 लाख टन है, जबकि देश के पास फिलहाल 20 से 25 लाख टन का सरप्लस स्टॉक मौजूद है. इसके बावजूद, आगामी त्योहारों के दौरान मांग में होने वाले इजाफे को देखते हुए सरकार ने एहतियातन 'कच्ची चीनी' (Raw Sugar) के अस्थायी आयात समेत कई जरूरी कदम उठाए हैं ताकि बाजार में उपलब्धता बनी रहे.

प्रशासन की अपील: घबराएं नहीं, पर्याप्त स्टॉक मौजूद; पैनिक बाइंग से बचें

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाजारों में चीनी की कोई कमी नहीं है. अपर ज़िलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति) अमित कुमार भारतीय ने बताया कि खाद्य विभाग की टीमें लगातार कीमतों और उपलब्धता पर नजर बनाए हुए हैं. थोक व खुदरा व्यापारियों को पोर्टल पर दैनिक स्टॉक दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जमाखोरी रोकी जा सके. प्रशासन ने आम जनता से पैनिक बाइंग (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) न करने की अपील की है.

विपक्ष ने कहा, एथेनॉल डायवर्जन और गन्ने के बकाए ने बिगाड़े हालात

  • गन्ना किसानों का बकाया: कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गन्ना किसानों को एक-एक साल तक भुगतान नहीं मिलता, जिससे वे गन्ने की खेती से दूर हो रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो भारत कभी चीनी का निर्यात करता था, वह आज आयात करने को मजबूर है.
  • एथेनॉल डायवर्जन पर घेरा: कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने गन्ने के रस को एथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट किए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं (आलू, प्याज, लहसुन) के दाम आसमान छू रहे हैं, तब चीनी के कच्चे माल को गाड़ियों के ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना आम जनता पर बोझ बढ़ा रहा है.

मंत्रालय का स्पष्टीकरण: एथेनॉल डायवर्जन नहीं है मुख्य वजह

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने साफ किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण एथेनॉल निर्माण नहीं है. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में लगभग 9% रह गया है. वर्तमान में देश के कुल एथेनॉल उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मक्के जैसे अनाजों से तैयार किया जा रहा है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

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अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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