शुक्रवार को बाजार की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई. सेंसेक्स 75,708.19 अंक पर खुला, जबकि पिछला बंद स्तर 76,391.39 अंक था. वहीं निफ्टी 23,666.35 अंक पर खुला, जबकि इससे पहले यह 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था.
रिपोर्टिंग के समय सेंसेक्स करीब 407.22 अंक यानी 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ 75,984.17 अंक पर कारोबार कर रहा था. वहीं निफ्टी 132.95 अंक यानी 0.56 फीसदी टूटकर 23,736.65 अंक के आसपास था.
तेल की कीमतों ने क्यों बढ़ाई बाजार की चिंता?
शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड पहली बार मई के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड करीब 100.67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं क्रूड ऑयल की कीमत करीब 91.95 डॉलर प्रति बैरल रही. भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता पैदा करती हैं. बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि तेल की कीमतों में तेजी से बाजार में दबाव बढ़ा है. उनके मुताबिक, निवेशक फिलहाल पहले बिकवाली कर रहे हैं और बाद में स्थिति का आकलन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाजार काफी ज्यादा गिर चुका है और किसी सकारात्मक संकेत से इसमें राहत की उम्मीद बन सकती है.
कौन से सेक्टर में दिखी तेजी और कहां रही गिरावट?
शुक्रवार को लगभग सभी सेक्टरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. हालांकि कुछ सेक्टरों ने कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई.
| बढ़त वाले सेक्टर | बदलाव |
| निफ्टी ऑटो | 0.69% की तेजी |
| निफ्टी मीडिया | 0.22% की तेजी |
वहीं ब्रॉड मार्केट के सभी प्रमुख इंडेक्स गिरावट में रहे.
बीएसई पर HCL Tech, TCS और Tech Mahindra के शेयरों में खरीदारी दिखी. दूसरी ओर Eternal, IndiGo, Bharti Airtel, Maruti, L&T, Infosys, Bajaj Finance, HDFC Bank, Kotak Bank, Power Grid, SBI और ITC जैसे शेयरों में दबाव रहा.
Nifty के लिए आगे कौन सा स्तर अहम है?
HSL Prime Research के देवरश वकील के अनुसार, निफ्टी अपने अहम औसत स्तरों से नीचे फिसल चुका है. उन्होंने कहा कि निफ्टी के लिए 23,645 से 23,500 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है, जबकि 24,000 से 24,100 का स्तर बड़ी चुनौती बना रहेगा. उन्होंने बताया कि रेड सी में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है. इसका असर भारतीय रुपये और महंगाई पर भी पड़ सकता है.
क्या बाजार में वापसी की उम्मीद है?
मार्केट एनालिस्ट विपिन दीक्षित के मुताबिक, बढ़ती तेल कीमतें, वेस्ट एशिया में तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेत बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं. हालांकि, कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण कुछ शेयरों में मौके बने हुए हैं.
तकनीकी तौर पर निफ्टी की स्थिति कमजोर बनी हुई है. RSI करीब 25 के स्तर पर है, जो बाजार के ओवरसोल्ड होने का संकेत देता है. इससे बीच-बीच में छोटी रिकवरी देखने को मिल सकती है, लेकिन 24,000-24,020 के स्तर को पार किए बिना तेजी टिकना मुश्किल माना जा रहा है.
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