मानसून लेट हुआ तो जेब खाली कर देगी महंगाई! जानिए कितना बढ़ सकता है खर्च

Slow Monsoon Progress Delay Inflation : मानसून की सुस्त रफ्तार बढ़ाएगी आफत! गर्मी के बाद अब महंगाई बिगाड़ेगी देश का बजट. जानिए क्यों अगले दो हफ्ते कम बरसेंगे बादल और इसका आपकी जेब पर क्या होगा असर.

Slow Monsoon Progress Delay Inflation : देश भर में उमस और तपती गर्मी के बीच झमाझम मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून की रफ्तार फिलहाल सुस्त पड़ती दिख रही है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में मौसम अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगले दो हफ्तों (आने वाले पखवाड़े) में भारत के मध्य और उत्तरी क्षेत्रों में औसत से काफी कम बारिश होने की संभावना है.

अगर मानसून का यह इंतजार और लंबा खिंचता है, तो यह सिर्फ गर्मी ही नहीं बढ़ाएगा बल्कि देश में महंगाई का एक नया संकट खड़ा कर देगा. आइए समझते हैं कि कैसे बादलों की ये सुस्ती हमारी रसोई के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है.

मानसून की रफ्तार में किसने लगाया ‘अड़ंगा’?

आमतौर पर 1 जून को केरल पहुंचने वाला मानसून इस साल 3 दिन की देरी से 4 जून को पहुंचा था. अब इसके आगे बढ़ने की रफ्तार को ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbances) ने धीमा कर दिया है.

क्या है पश्चिमी विक्षोभ

यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाला एक वेदर सिस्टम है, जो उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी लाता है. लेकिन इस बार इसने मानसूनी हवाओं के रास्ते में रुकावट पैदा कर दी है, जिससे मानसून को मध्य भारत तक पहुंचने में कुछ और दिनों की देरी हो सकती है.

क्यों ‘लाइफलाइन’ है मानसून?

भारतीय अर्थव्यवस्था को आज भी ‘मानसून का जुआ’ कहा जाता है, क्योंकि देश में सालभर में होने वाली कुल बारिश का 70 फीसदी हिस्सा अकेले इसी मानसून सीजन (जून से सितंबर) में बरसता है. आज के आधुनिक दौर में भी भारत की लगभग 50% खेती सिंचाई के लिए पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर है. देश की आधी आबादी का गुजारा इसी खेती से चलता है. यही बारिश हमारे बांधों, नदियों और जलाशयों को भरती है, जिससे सालभर पीने का पानी, खेतों की सिंचाई और पनबिजली (Electricity) का उत्पादन होता है.

थाली तक कैसे पहुंचेगी महंगाई ?

मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून ने केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और दक्षिणी महाराष्ट्र के हिस्सों को तो कवर कर लिया है और वहां अच्छी बारिश होगी. लेकिन उत्तर और मध्य भारत (जो देश का मुख्य अन्न भंडार हैं) में अगले दो हफ्ते सूखा निकल सकता है.

बारिश न होने से धान (चावल), कपास, सोयाबीन और अरहर-मूंग जैसी दालों की बुवाई में भारी देरी होगी. बुवाई लेट होने से फसलों की पैदावार घटेगी. जब बाजार में अनाज और सब्जियों की सप्लाई कम होगी और मांग (Demand) वैसी ही रहेगी, तो कीमतें तेजी से भागेंगी.

अनाज महंगा होने से देश के आर्थिक रूप से कमजोर तबके पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. भोजन की कमी से बच्चों में कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है. घरेलू बाजार में अनाज की कमी पूरी करने के लिए सरकार को निर्यात (Export) पर बैन लगाना पड़ेगा, जिससे देश की विदेशी कमाई घटेगी और आम जनता से जुड़ी सरकारी योजनाएं प्रभावित होंगी.

Also Read : क्या फिर बढ़ेगी महंगाई? ईरान-अमेरिका जंग से कच्चे तेल के दाम हुए $90 के पार

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >