कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 600 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ खुला. हालांकि शुरुआती तेजी के बाद कुछ प्रॉफिट बुकिंग भी देखने को मिली. अब निवेशकों की सबसे बड़ी नजर आज आने वाले आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) के फैसले पर है.
सेंसेक्स 79,055.38 पर खुला, जो पिछले क्लोज 78,428.95 के मुकाबले 626.43 अंक ऊपर था. वहीं निफ्टी 24,669.20 पर खुला. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 406.28 अंक की बढ़त के साथ 78,835.23 और निफ्टी 24,623.60 पर कारोबार कर रहा था.
क्रूड ऑयल की कीमतें घटने से बाजार को कैसे मिला सपोर्ट?
ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलकर करीब 78.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं क्रूड ऑयल करीब 74.55 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से:
- महंगाई का दबाव कम हो सकता है.
- भारत का मैक्रो आउटलुक बेहतर हो सकता है.
- रुपये को सपोर्ट मिल सकता है.
यही वजह है कि बाजार का सेंटीमेंट फिलहाल पॉजिटिव बना हुआ है.
किन सेक्टर्स और शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?
शुरुआती कारोबार में सभी ब्रॉड मार्केट इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते दिखे. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा गेनर रहा और करीब 1.62 प्रतिशत चढ़ा.
टॉप गेनर्स
- ट्रेंट
- एमएंडएम
- एलएंडटी
- कोटक बैंक
- टेक महिंद्रा
- एक्सिस बैंक
- इन्फोसिस
- विप्रो
- बजाज फाइनेंस
- एनटीपीसी
टॉप ड्रैग्स
- सन फार्मा
- टाइटन
- बीईएल
- कोल इंडिया
- सिप्ला
- ओएनजीसी
- जेएसडब्ल्यू स्टील
- मैक्स हेल्थ
आरबीआई एमपीसी का फैसला क्यों है इतना अहम?
मार्केट और बैंकिंग एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, लगातार एफपीआई इक्विटी इनफ्लो, पहली तिमाही के कॉरपोरेट अर्निंग्स और लॉन्ग टर्म फॉरेन कैपिटल को आकर्षित करने वाले कानूनी बदलाव बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं. उनके अनुसार निफ्टी के लिए 24,400 से 24,300 का लेवल अहम सपोर्ट है, जबकि 25,000 बड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है.
एक्सिस डायरेक्ट के हेड ऑफ रिसर्च राजेश पालविया का कहना है कि कम क्रूड ऑयल कीमतों से महंगाई का दबाव घट सकता है और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है. अगर निफ्टी 24,700 के ऊपर टिकता है तो 25,000 का लेवल दोबारा देखने को मिल सकता है. वहीं 24,400 और उसके बाद 24,200 अहम सपोर्ट लेवल रहेंगे.
मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सेना के मुताबिक, निवेशक फिलहाल आरबीआई की पॉलिसी आने तक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं. हालांकि पहली तिमाही के अच्छे अर्निंग्स देने वाली कंपनियों के शेयर फोकस में बने रह सकते हैं. उनका मानना है कि आरबीआई के फैसले तक बाजार एक सीमित रेंज में रह सकता है और स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन ज्यादा देखने को मिलेगा.
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