रुपया अगर ₹2 और टूटा तो बेकार जाएगी पेट्रोल-डीजल की ₹3 की बढ़ोतरी! SBI रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

SBI Research : एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा.अगर डॉलर के मुकाबले रुपया सिर्फ 2 रुपये और गिरा, तो पेट्रोल-डीजल पर बढ़े 3 रुपये का कोई फायदा नहीं बचेगा. जानें तेल कंपनियों के भारी नुकसान का पूरा गणित.

SBI Research : शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था, उसे लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट ‘Ecowrap’ ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपया इस समय गिरावट के ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है कि अगर यह डॉलर के मुकाबले सिर्फ 2 रुपये और टूट जाता है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने से होने वाला सारा फायदा पूरी तरह खत्म (Offset) हो जाएगा. आइए समझते हैं कि एसबीआई की इस रिपोर्ट में देश की आर्थिक सेहत को लेकर क्या बड़ी बातें कही गई हैं.

2 रुपये की गिरावट और ₹3 का खेल खत्म!

एसबीआई रिसर्च ने गणित समझाते हुए कहा है कि इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल औसतन $106 प्रति बैरल पर है. अगर हम डॉलर का मुकाबला ₹94 के औसत रेट पर भी मान लें, तो भारत को एक बैरल तेल मंगाने की लैंडेड कॉस्ट (भारत पहुंचने की कीमत) लगभग ₹9,964 पड़ती है.

पेट्रोल-डीजल में ₹3 की बढ़ोतरी करने से तेल कंपनियों को प्रति बैरल करीब ₹477 का फायदा हो रहा है. लेकिन, अगर यहाँ से रुपया सिर्फ ₹2 और कमजोर हो जाता है, तो विदेश से तेल मंगाने का खर्च इतना बढ़ जाएगा कि यह ₹477 का फायदा पूरी तरह स्वाहा हो जाएगा और कंपनियां फिर से भारी घाटे में आ जाएंगी.

हर दिन 1,000 करोड़ का नुकसान!

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) की हालत इस समय बहुत पतली है.

रोज का घाटा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू रेट न बढ़ने से तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
सालाना बोझ: अगर यही रफ्तार रही, तो साल भर का यह घाटा 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा.
₹3 की बढ़ोतरी से कितनी राहत?: पेट्रोल-डीजल पर जो ₹3 बढ़ाए गए हैं, उससे कंपनियों को साल भर में करीब ₹52,700 करोड़ की राहत मिलेगी. लेकिन यह राहत उनके कुल अनुमानित घाटे का सिर्फ 15 परसेंट ही कवर कर पाएगी.

होर्मुज संकट और तेल की किल्लत

ग्लोबल मार्केट की बात करें तो पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला तेल और एलपीजी (LNG) का ट्रांसपोर्टेशन बहुत तेजी से घटा है.

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए एसबीआई ने कहा कि दुनिया भर में कच्चे तेल का स्टॉक (Inventories) कम हो रहा है, जिसकी वजह से आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और बढ़ेगा यानी ये और महंगी हो सकती हैं.

आम आदमी पर क्या होगा असर ?

तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर देश की रिटेल महंगाई दर (CPI Inflation) पर पड़ेगा. एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, मई-जून 2026 के दौरान इस फ्यूल हाइक की वजह से महंगाई दर में 0.15% से 0.20% (15-20 बेसिस पॉइंट्स) की तुरंत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. इस संकट को देखते हुए एसबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है.

एसबीआई की सरकार को सलाह

एसबीआई रिसर्च ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत को इस समय सिर्फ तेल के दाम बढ़ाने जैसे तात्कालिक कदमों से ऊपर उठना होगा. देश को बाहरी आर्थिक झटकों और रुपये को बचाने के लिए एक मजबूत और व्यापक ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ (Balance of Payments) पॉलिसी की तुरंत जरूरत है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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