बैंकिंग फ्राॅड से ग्राहकों को बचाने के लिए एसबीआई ने योनो पर शुरू किया सिम बाइंडिंग सिस्टम, ऐसे करता है काम…

बैंकिंग फ्राॅड की आम होती खबरों के बीच भारतीय स्टेट बैंक ने योनो और योनो लाइट के लिए एक नयी और सुरक्षित सुविधान सिम बाइंडिंग लाॅन्च किया है. सिम बाइंडिंग का उद्देश्य ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग उपलब्ध कराना है.

  • भारतीय स्टेट बैंक ने सिम बाइंडिंग लाॅन्च किया

  • ग्राहकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना है उद्देश्य

  • रजिस्टर करते वक्त अपने फोन नंबर का रखें खास ध्यान

बैंकिंग फ्राॅड की आम होती खबरों के बीच भारतीय स्टेट बैंक ने योनो और योनो लाइट के लिए एक नयी और सुरक्षित सुविधान सिम बाइंडिंग लाॅन्च किया है. सिम बाइंडिंग का उद्देश्य ग्राहकों को सुरक्षित बैंकिंग उपलब्ध कराना है.

एसबीआई की ओर से कहा गया है कि इस सुविधा के जरिये ग्राहक आसानी से घर बैठे स्मार्ट बैंकिंग कर सकेंगे और उनके मन में असुरक्षा का भाव भी उत्पन्न नहीं होगा.

सिम बाइंडिंग क्या है और कैसे होगा इस्तेमाल

सिम बाइंडिंग सिस्टम का उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना है. सिम बाइंडिंग सिस्टम के आ जाने से योनो और योनो लाइट केवल उन्हीं डिवाइस पर काम करेंगे जिनके मोबाइल नंबरों की सिम बैंक में रजिस्टर्ड है. सिम बाइंडिंग सिस्टम का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को अपने फोन पर योनो और योनो लाइट को एक बार अपडेट करना होगा और उसे रजिस्टर भी करना होगा, उसके बाद ही उन्हें सिम बाइंडिंग सिस्टम का लाभ मिलेगा.

रजिस्टर करते वक्त रखें इस बात का ख्याल

बैंक की ओर से कहा गया है कि सिम बाइंडिंग सिस्टम का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे उस डिवाइस के साथ खुद को रजिस्ट करें जिसमें पंजीकृत संपर्क नंबर का सिम है. यदि ग्राहक ऐसे मोबाइल नंबर का उपयोग कर रहा है, जो बैंक के साथ पंजीकृत नहीं है, तो वे योनो और योनो लाइट पर पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने में असमर्थ होंगे और उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पायेगा.

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Posted By : Rajneesh Anand

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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