SBI ATM Cash Crunch : अगर आपके पास देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का अकाउंट है और आप उत्तर प्रदेश के कानपुर, गोरखपुर, बस्ती, बलिया या बहराइच जैसे छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3 शहरों) में रहते हैं, तो आपने पिछले कुछ समय में एटीएम से पैसे निकालते वक्त भारी किल्लत या ‘नो कैश’ का बोर्ड जरूर देखा होगा.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक खोजी रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एसबीआई अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के एटीएम में जरूरत से बहुत कम कैश डाल रहा है, जबकि बड़े महानगरों (टियर-1 शहरों) के एटीएम को ज्यादा तरजीह (Priority) दी जा रही है.
मामला पहुंचा RBI के पास
इस भेदभावपूर्ण रवैये के कारण एटीएम चलाने वाली कंपनियां (ATM Operators) और बैंकिंग उद्योग अब आमने-सामने आ गए हैं. इस समस्या को सुलझाने के लिए 5 जून 2026 को एटीएम कंपनियों के प्रतिनिधियों, एसबीआई और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच एक हाई-लेवल मीटिंग हुई.
चैंबर्स ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने आरबीआई के सामने कड़ी चिंता जताते हुए कहा है कि इस पूरी समस्या की जड़ खुद एसबीआई है. बड़े शहरों में ज्यादा कैश डंप करने की वजह से छोटे शहरों के एटीएम खाली पड़े हैं.
एटीएम इंडस्ट्री का कहना है कि एटीएम में कैश न होने की वजह से लोग ट्रांजैक्शन नहीं कर पा रहे हैं. इससे ऑपरेटर्स को मिलने वाली इंटरचेंज फीस (Interchange Fee) का भारी नुकसान हुआ है. इस घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने बैंकिंग इंडस्ट्री से 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है.
एसबीआई के नेटवर्क का पूरा गणित
भारत में सबसे बड़ा एटीएम नेटवर्क स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ही है.
- देश भर में एसबीआई के कुल 65,000 एटीएम हैं.
- इनमें से करीब 50% एटीएम में एसबीआई खुद कैश लोड करता है, जो मुख्य रूप से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े महानगरों में स्थित हैं.
- छोटे शहरों के एटीएम को आउटसोर्स (थर्ड पार्टी कंपनियों के भरोसे) किया गया है, जहां पर्याप्त कैश फीड नहीं मिल पा रहा है. एक एटीएम कंपनी के सीईओ ने बताया कि छोटे शहरों में अन्य छोटे बैंकों के एटीएम में तो कैश है, लेकिन एसबीआई के एटीएम खाली पड़े हैं.
क्यों बंद होने की कगार पर हैं देश के ATM ?
एटीएम ऑपरेटर्स ने एसबीआई को 20 जून 2026 तक इस समस्या का समाधान निकालने का अल्टीमेटम दिया है. अगर हालात नहीं सुधरे, तो छोटे शहरों में एसबीआई के एटीएम हमेशा के लिए बंद हो सकते हैं. इसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं.
कई राज्यों में एटीएम सिक्योरिटी और स्टाफ का न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) 60% तक बढ़ चुका है. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कैश वैन (Cash Vans) का लॉजिस्टिक्स खर्च भी बढ़ गया है. डिजिटल पेमेंट (UPI) के बढ़ते चलन के कारण अब लोग एटीएम से कम पैसा निकाल रहे हैं.
जनवरी 2023 में जहां देश भर में हर महीने एटीएम से 57 करोड़ बार कैश निकाला जाता था, वहीं सितंबर 2025 तक यह संख्या घटकर 43 करोड़ 95 लाख रह गई.
घाटे के चलते देश में एटीएम लगातार सिकुड़ रहे हैं. साल 2023 में देश भर में 2 लाख 53 हजार एटीएम थे, जो 2024 में घटकर 2 लाख 51 हजार रह गए. इस तरह करीब 2,000 एटीएम कम हो चुके हैं और यह कमी सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में हुई है.
एटीएम ट्रांजैक्शन का घटता ट्रेंड
| समय / वर्ष | देश में कुल एटीएम की संख्या | मासिक एटीएम ट्रांजैक्शन (निकासी) |
| साल 2023 | 2,53,000 | 57 करोड़ प्रति महीना |
| साल 2024 / 2025 | 2,51,000 | 43.95 करोड़ प्रति महीना |
| नेट बदलाव (गिरावट) | 2,000 एटीएम बंद हुए | ~13 करोड़ ट्रांजैक्शन घटे |
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