Russia Gold Reserves: यूक्रेन के साथ युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करते ही रूस की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. bne Intellinews की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सरकार ने अपने बजट घाटे (बजट की कमी) को पूरा करने के लिए पिछले 25 वर्षों में पहली बार अपने केंद्रीय बैंक के रिजर्व से फिजिकल गोल्ड (असली सोना) बेचना शुरू कर दिया है.
रिकॉर्ड तोड़ बिक्री और घटता रिजर्व
रूस ने केवल 2026 के पहले दो महीनों (जनवरी और फरवरी) में ही लगभग ₹3 लाख करोड़ ($35 बिलियन) मूल्य का रिजर्व बेच दिया है.
- कितना सोना बिका: जनवरी में 3 लाख औंस और फरवरी में 2 लाख औंस सोना बेचा गया.
- सबसे बड़ी गिरावट: पिछले दो महीनों में 14 टन सोने की यह बिक्री साल 2002 के बाद की सबसे बड़ी बिक्री है. इसके चलते रूस का सोने का भंडार पिछले 4 साल के सबसे निचले स्तर (74.3 मिलियन औंस) पर आ गया है.
क्यों बेच रहा है रूस अपना सोना ?
युद्ध के भारी खर्चों ने रूस के बजट का गणित बिगाड़ दिया है.
- बजट घाटा: 2025 के अंत तक रूस का बजट घाटा जीडीपी का 2.6% रहा, जो अनुमान से कहीं ज्यादा है. जानकारों का मानना है कि यह असल में 3.4% तक हो सकता है.
- कमाई में कमी: तेल की गिरती कीमतों और कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से रूस की तेल-गैस से होने वाली कमाई आधी रह गई है. अब कुल राजस्व में इसकी हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 20% बची है.
सोने की बढ़ती कीमतें और रूस की रणनीति
दिलचस्प बात यह है कि रूस ने सोना तब बेचना शुरू किया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें $5,000 प्रति औंस के पार पहुंच गई हैं.
- कुल संपत्ति: सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से रूस का कुल अंतरराष्ट्रीय रिजर्व बढ़कर $809 बिलियन (करीब ₹67 लाख करोड़) हो गया है, जिसमें से लगभग $300 बिलियन पश्चिमी देशों ने फ्रीज कर रखे हैं.
- दुनिया में स्थान: रूस अभी भी दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सोना रखने वाला देश है (2,000 टन से ज्यादा). वह 2014 से ही डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सोना जमा कर रहा था.
पैसे जुटाने के अन्य रास्ते
सोना बेचने के अलावा रूस की सरकार इन तरीकों से भी पैसा जुटा रही है.
- नेशनल वेलफेयर फंड: इस फंड में अभी करीब ₹4 लाख करोड़ बचे हैं, जो इस साल के घाटे को भरने के लिए काफी हैं.
- टैक्स में बढ़ोतरी: रूस ने VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स) में 2% की बढ़ोतरी की है. अब रूस की कुल कमाई का 40% हिस्सा इसी टैक्स से आता है.
- घरेलू बॉन्ड: सरकार घरेलू बाजार में बॉन्ड जारी करके भी कर्ज ले रही है.
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