Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. बुधवार सुबह ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 101.57 डॉलर पर बना हुआ है. पिछले कुछ दिनों में कीमतों में लगभग 4% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का खतरा मंडरा रहा है.
क्यों थम गई ईरान की तेल सप्लाई?
इस संकट की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान के मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल ‘खार्ग आइलैंड’ पर पिछले कई दिनों से एक भी टैंकर नहीं पहुंचा है. अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी इतनी सख्त हो गई है कि ईरान का तेल निर्यात पिछले 28 दिनों से लगभग पूरी तरह ठप है.
युद्ध का खर्च उम्मीद से ज्यादा क्यों?
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की एक रिपोर्ट ने निवेशकों को चौंका दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इस संघर्ष में अमेरिका का अब तक का खर्च 29 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो शुरुआती अनुमान (25 बिलियन डॉलर) से कहीं ज्यादा है. हथियारों की मरम्मत और ऑपरेशनल खर्च बढ़ने की वजह से यह आंकड़ा बढ़ा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने हालांकि चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक से पहले कहा कि हालात काबू में हैं, लेकिन बाजार उनकी बातों से आश्वस्त नहीं दिख रहा है.
भारत और दुनिया पर इसका क्या असर होगा?
तेल की कमी के कारण जापान जैसे देशों ने अब मेक्सिको से तेल खरीदना शुरू कर दिया है. वियतनाम की सरकारी तेल कंपनी ने अमेरिका से अपील की है कि उनके तेल टैंकरों को रास्ता दिया जाए, ताकि देश में फ्यूल का संकट पैदा न हो. अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर हैं. चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में 107 डॉलर की यह कीमत घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल को महंगा कर सकती है, जो सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालेगी.
ये भी पढ़ें: शहर से ज्यादा गांवों में महंगाई की मार, अप्रैल के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
